बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार को एक स्थानीय अदालत को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर मानहानि की शिकायत पर सुनवाई 20 दिसंबर से आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। इसका मतलब है कि अब राहुल को 25 नवंबर को स्थानीय अदालत में उपस्थित होने की जरूरत नहीं पड़ेगी। राहुल ने 'कमांडर-इन-थीफ' टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ दर्ज मानहानि मामला खत्म करने की गुहार लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी
सुनवाई के दौरान क्या हुआ
सोमवार को जब राहुल की याचिका सुनवाई के लिए न्यायमूर्ति एसके शिंदे की एकल पीठ के समक्ष आई, तब श्रीश्रीमल की ओर से अधिवक्ता रोहन महाडिक ने हलफनामा के रूप में जवाब दाखिल करने के लिए वक्त मांगा। वहीं, कांग्रेस नेता के वकील सुदीप पसबोला ने कहा कि यदि जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया जाता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन तब तक मजिस्ट्रेट के समक्ष कार्यवाही नहीं होनी चाहिए। इसके बाद कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई 16 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दी और श्रीश्रीमल को अपना हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति शिंदे ने कहा कि मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट शिकायत पर कार्यवाही 20 दिसंबर तक टाल दें।
क्या है पूरा मामला
- दरअसल, राहुल गांधी की उक्त टिप्पणी के खिलाफ महाराष्ट्र में एक भाजपा समर्थक ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि मामला दायर किया है। याचिकाकर्ता महेश श्रीश्रीमाल ने याचिका में कहा है कि राहुल गांधी ने 2018 में राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर प्रधानमंत्री पर हमला करते हुए उक्त टिप्पणी की थी।
- शिकायत का संज्ञान लेने के बाद, मुंबई की एक अदालत ने अक्तूबर 2019 में राहुल गांधी को समन जारी किया था। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अब तक मजिस्ट्रेट अदालत के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हुए हैं। इसके बाद मानहानि मामला निरस्त करने के लिए राहुल गांधी की ओर से उनके वकील कुशल मोर ने बॉम्बे हाईकोर्ट में जस्टिस एसके शिंदे के समक्ष अर्जी दायर की थी। इसमें कहा गया था कि उक्त टिप्पणी प्रधानमंत्री के खिलाफ की गई थी, याचिकाकर्ता पीड़ित पक्ष या मामले से संबद्ध नहीं है।
- मामले में श्रीश्रीमाल का कहना है कि राहुल गांधी के बयान से प्रधानमंत्री के समर्थकों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी ने न केवल प्रधानमंत्री बल्कि भाजपा के सदस्यों को भी बदनाम किया है।