जलियांवाला बाग स्मारक ट्रस्ट से कांग्रेस अध्यक्ष को सदस्य के तौर पर हटाने वाला बिल शुक्रवार को लोकसभा में पास हो गया। भारी विरोध और कांग्रेस के वॉक आउट के बीच जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक संशोधन बिल को ध्वनिमत से पारित किया गया। कांग्रेस ने सरकार पर आजादी का इतिहास बदलने का आरोप लगाते हुए बिल में संशोधन का प्रस्ताव दिया था जिसे 30 के मुकाबले 214 मतों से खारिज कर दिया गया।
इससे पहले बिल पर बहस के दौरान संस्कृति मंत्री प्रह्लाद पटेल ने कहा ऊधम सिंह और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देने का यही सही तरीका है। बिल में जलियांवाला बाग ट्रस्ट से कांग्रेस अध्यक्ष का नाम हटाने का प्रावधान है। साथ ही इसमें विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी के सदस्य को ट्रस्टी के तौर पर शामिल करने का भी प्रावधान है। अभी लोकसभा में विपक्ष का नेता ही ट्रस्ट का सदस्य होता है। इसके अतिरिक्त यह बिल केंद्र को किसी भी ट्रस्टी की सदस्यता खत्म करने का अधिकार देता है।
आजादी की लड़ाई से कांग्रेस का योगदान मिटाने की साजिश : औजला
बिल का विरोध करते हुए कांग्रेस सांसद गुरजीत औजला ने कहा, केंद्र सरकार ट्रस्ट से कांग्रेस अध्यक्ष का नाम हटाकर देश के इतिहास को बदलना चाहती है, उसकी आजादी के संघर्ष में कांग्रेस के योगदान को हटाने की साजिश है लेकिन वह सफल नहीं होगी।
औजला ने कहा, भाजपा या उसकी विचारधारा वाले किसी संगठन ने आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं दिया है। औजला ने कहा कि जब आप ने खुद कुछ किया नहीं तो कैसे आप स्मारक का नियंत्रण अपने हाथ में लेना चाहते हैं। इस पर भाजपा सांसदों ने नारेबाजी की और हंगामा शुरू कर दिया।
हरसिमरत का पलटवार- 1984 के दंगे कांग्रेस ने कराए
औजला के बयान पर अकादी दल सदस्य और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने पलटवार करते हुए कहा कि देश में 1984 में सिखों के खिलाफ दंगे भी कांग्रेस ने ही कराए थे। कांग्रेस के एक मुख्यमंत्री के करीबी रिश्तेदार ने तो जलियांवाला बाग नरसंहार कराने वाले जनरल डायर की तारीफ भी की। यह भी इतिहास है और इसे आप नहीं बदल सकते।
कांग्रेस सांसदों ने दिखाए ड्रग माफियाओं के पोस्टर
हरसिमरत के बयान के बाद कांग्रेस सांसदों ने बादल के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। कांग्रेस नेताओं ने केंद्रीय मंत्री को पंजाब में ड्रग माफियाओं वाले पोस्टर दिखाए और हंगामा किया।
मुझे शर्म आती है यह नजारा देखकर : मारन
द्रमुक नेता दयानिधि मारन ने कहा, सदन का यह नजारा देखकर मुझे शर्म आ रही है। उन्होंने कहा आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेने वाली कांग्रेस इकलौती पार्टी है। अन्य पार्टियां इससे ही निकलीं। भाजपा के पास प्रचंड बहुमत है और उसे इसकी जिम्मेदारी समझनी चाहिए लेकिन अफसोस की ऐसा हो नहीं रहा। उन्होंने सरकार से बिल वापस लेने की भी मांग की।
ट्रस्ट का मौजूदा स्वरूप
अभी जलियांवाला बाग स्मारक ट्रस्ट में प्रधानमंत्री अध्यक्ष होते हैं। इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष, संस्कृति मंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष, पंजाब के राज्यपाल और मुख्यमंत्री सदस्य होते हैं। 13 अप्रैल 1919 में हुए जलियांवाला बाग नरसंहार की यादगार के तौर पर स्मारक की स्थापना 1951 में केंद्र सरकार द्वारा की गई थी।