साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर (फाइल फोटो)
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एनआईए ने शुक्रवार को बांबे हाईकोर्ट से बताया कि वह मालेगांव विस्फोट मामले में अभियोजन के 38 ‘संवेदनशील’ गवाहों के लिए पुलिस सुरक्षा चाहती है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने कहा कि इसके लिए वह एक निचली अदालत में याचिका दाखिल करेगी।
बता दें कि सितंबर, 2008 में हुई इस बम धमाके में भोपाल से भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित और 5 अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। इन सभी पर यूएपीए और आईपीसी के तहत आतंक फैलाने व साजिश रचने के आरोपों में मुकदमा चलाया जा रहा है। 29 सितंबर, 2008 को उत्तरी महाराष्ट्र के मालेगांव कस्बे में एक मस्जिद के करीब मोटरसाइकिल में रखे विस्फोटक के फटने से 6 लोगों की मौत हो गई थी और 100 के करीब घायल हो गए थे।
एनआईए के वकील संदेश पाटिल ने कर्नल पुरोहित की तरफ से दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही जस्टिस आईए महांती और जस्टिस एएम बदर की डिविजन पीठ के सामने गवाहों की पुलिस सुरक्षा का मुद्दा उठाया। कर्नल पुरोहित ने अपनी याचिका में गवाहों के बिना कांटछांट वाले बयानों की प्रति देने की मांग की थी, जो चार्ज शीट का हिस्सा हैं। एनआईए के वकील पाटिल ने पीठ से कहा, 475 गवाहों में से 186 के बयानों में कांटछांट की गई है।
इन 186 में से 38 गवाह बेहद संवेदनशील किस्म के हैं। उन्हें सुरक्षा देने और उनके सबूतों को कैमरे के सामने रिकॉर्ड किए जाने की जरूरत है। पाटिल ने कहा, हम अन्य गवाहों के बिना कांटछांट वाले बयान आरोपी (पुरोहित) को देने के लिए तैयार हैं। पाटिल ने यह भी बताया कि एजेंसी की तरफ से विशेष एनआईए कोर्ट के सामने इन 38 गवाहों को पुलिस सुरक्षा दिए जाने की अपील दाखिल की जाएगी। मामले में अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।