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Seat Ka Samikaran: इमामगंज से जीत की हैट्रिक लगा चुका मांझी परिवार, JDU नेता के नाम है पांच जीत का रिकॉर्ड

Tue, 05 Aug 2025 07:33 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला

सार

बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज इमामगंज विधानसभा सीट की बात करेंगे। इमामगंज सीट से  2015 और 2020 में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने जीत हासिल की थी। मौजूद समय में उनकी बहू दीपा मांझी विधायक हैं।

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बिहार चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार विधानसभा चुनाव से जुड़ी हमारी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज बात इमामगंज सीट की करेंगे। इमामगंज सीट से 2015 और 2020 में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने जीत हासिल की थी। 2024 के उपचुनाव में जीत दर्ज कर जीतन राम की बहू दीपा मांझी विधायक हैं। इसी सीट से जीत कर कभी उदय नारायण बिहार के विधानसभा अध्यक्ष बने थे। 

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गया जिले में आती है इमामगंज सीट

बिहार के 38 जिलों में से एक जिला गया भी है। गया जिला चार अनुमंडल और 24 ब्लॉक में बंटा है। जिले में दस विधानसभा सीट हैं। इनमें गरुआ, शेरघाटी, इमामगंज (एससी), बाराचट्टी (एससी), बोधगया (एससी) ,गया टाउन, टिकारी, बेलागंज, अत्री, वजीरगंज शामिल हैं। आज सीट का समीकरण में इमामगंज सीट की बात करेंगे। इमामगंज सीट पहली बार 1957 में अस्तित्व में आई। मौजूदा समय में इमामगंज सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है। 

1957: अंबिका प्रसाद सिंह को मिली जीत 

  • 1957 में इमामगंज विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार अंबिका प्रसाद सिंह को जीत मिली। इसके साथ ही अंबिका को 1962 के चुनाव में भी जीत मिली। उन्होंने 1957 के चुनाव में कांग्रेस की चंद्रावती देवी को 2,049 वोट से हराया। अंबिका को कुल 10,643 वोट मिले। वहीं चंद्रावती को 8,594 वोट मिले। 
  • 1962 के चुनाव में अंबिका प्रसाद सिंह ने स्वतंत्र पार्टी से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के जगलाल महतो को 1,153 वोट से हराया। अंबिका को कुल 12,662 वोट मिले। वहीं जगलाल को 11,509 वोट मिले।

 

1967: कांग्रेस को मिली पहली जीत

1967 के चुनाव में इमामगंज से कांग्रेस ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में कांग्रेस के देवधर राम ने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी (संसोपा) की बी. देवी को 3,003 वोट से हराया। देवधर राम को कुल 11,137 वोट मिले। वहीं बी. देवी को 8,134 वोट से संतोष करना पड़ा। 

1969: संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी को मिली जीत
1969 विधानसभा चुनाव में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के ईश्वर दास ने 6,905 वोट से जीत हासिल की। वहीं, जनसंघ के गनौरा धोबी दूसरी नंबर पर रहे। ईश्वर दास को कुल 14,577 वोट मिले। वहीं, गनौरा धोबी को मात्र 7,672 वोट मिले। इस चुनाव में तत्कालीन विधायक देवधर राम तीसरे नंबर पर रहे।

1972: कांग्रेस की वापसी
1972 के चुनाव में कांग्रेस के अवधेश्वर राम को जीत मिली। उन्होंने तत्कालीन विधायक और सोशलिस्ट पार्टी के ईश्वर दास को 4,022 वोट से हराया।  अवधेश्वर राम को 15,527 वोट मिले। वहीं, ईश्वर दास को 11,505 वोट से संतोष करना पड़ा। 
 


 

1977: ईश्वर दास की वापसी
ईश्वर दास ने पिछले चुनाव का बदला लेते हुए 1977 में जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस के श्रीचंद्र सिंह को 16,883 वोट से शिकस्त दी। ईश्वर दास को कुल 24,094 वोट मिले। वहीं श्रीचंद्र को 7,211 वोट से संतोष करना पड़ा।


 

1980: श्रीचंद्र सिंह को मिली जीत 

  • 1980 के चुनाव में कांग्रेस के श्रीचंद्र सिंह को जीत मिली। श्रीचंद्र ने 1985 के चुनाव में भी जीत हासिल की। श्रीचंद्र ने दो बार के विधायक ईश्वर दास को 19,201 वोट से हराया। श्रीचंद्र को कुल 29,879 वोट मिले। वहीं ईश्वर दास को 10,678 वोट मिले। 
  • 1985 के चुनाव में कांग्रेस के श्रीचंद्र ने जीत ने लोकदल के जगदीश सिंह को 9,233 वोट से हराया। श्रीचंद्र सिंह को 37,323 वोट मिले और जगदीश सिंह को 28,090 वोट मिले। इस चुनाव में दो बार के विधायक ईश्वर सिंह तीसरे नंबर पर रहे।

1990: उदय नारायण को मिली जीत 
1990 विधानसभा के चुनाव में इमामगंज सीट से जनता दल के उदय नारायण को जीत मिली। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार राम स्वरूप पासवान को 10,200 वोट से हराया। उदय नारायण को कुल 33,137 वोट मिले। वहीं राम स्वरूप को 22,937 वोट मिले। इस चुनाव में तत्कालीन विधायक श्रीचंद्र तीसरे नंबर पर रहे। 


 

1995: 120 वोट से जीते राम स्वरूप 
पिछले चुनाव में हार का सामना करने वाले राम स्वरूप ने जीत हासिल की। राम स्वरूप यह चुनाव समता पार्टी के टिकट से लड़ा। उन्होंने तत्कालीन विधायक उदय नारायण को मात्र 120 वोट से हराया। राम स्वरूप को कुल 26,670 वोट मिले। वहीं, उदय नारायण को 26,550 वोट मिले।

2000: उदय नारायण का गढ़ बना इमामगंज 

  • पिछले चुनाव का बदला लेते हुए 2000 के चुनाव में उदय नारायण ने जीत दर्ज की। उन्होंने यह चुनाव समता पार्टी से लड़ा। उदय नारायण ने राजद के राम स्वरूप पासवान को 12,501 वोट से हराया। उदय नारायण को कुल 40,769 वोट मिले। वहीं, राम स्वरूप को 28,268 वोट मिले। इस चुनाव में कांग्रेस चौथे नंबर पर रही। 
  • 2005 में बिहार में दो बार चुनाव हुए थे। पहला फरवरी और दूसरा अक्तूबर में। उदय नारायण चौधरी ने फरवरी 2005 का चुनाव जदयू के टिकट पर लड़ा। इस चुनाव में उन्होंने राजद के राम स्वरूप पासवान को 1,271 वोट से हराया। उदय नारायण को कुल 24,454 वोट मिले। वहीं, राम स्वरूप पासवान को 23,183 वोट मिले थे।
  • 2005 अक्तूबर में जदयू के नेता लगातार तीसरी बार इमामगंज के विधायक बने। उन्होंने राजद के राम स्वरूप पासवान को 6,642 वोट से हराया। उदय नारायण को कुल 30,685 वोट से मिले। वहीं राम स्वरूप को 24,023 वोट से संतोष करना पड़ा।
  • 2010 के चुनाव में जदयू के उदय नारायण ने राजद के रौशन कुमार को मात्र 1,211 वोट से हराया। उदय नारायण को कुल 44,126 वोट मिले और रौशन कुमार को 42,915 वोट मिले। इसके साथ ही उदय नारायण इमामगंज से विधायक रहते हुए बिहार विधानसभा के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने 2005 से 2015 तक स्पीकर के तौर पर कार्यभार संभाला। 

2015: जीतन राम बने विधायक
लगातार चार बार विधायक रहे उदय नारायण को 2015 में हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को 29,408 वोट से जीत मिली। यह चुनाव जीतन राम मांझी ने हम पार्टी से लड़ा था। जीतन राम मांझी को कुल 79,389 वोट मिले। वहीं, जदयू के उदय नारायण को मात्र 49,981 वोट से संतोष करना पड़ा।


 

2020 में जीतन राम मांझी के जीत के आंकड़ो में कमी आई। उन्होंने राजद के उदय नारायण को 16,034 वोट से शिकस्त दी। जीतन राम को कुल 78,762 वोट मिले। वहीं उदय नारायण को 62,728 मिले।


 
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2024: दीपा मांझी बनी विधायक
2024 में जीतन राम मांझी गया से सांसद के रूप में चुने गए। इस कारण उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा दिया। मांझी के इस्तीफे के कारण इमामगंज सीट पर 2024 में उपचुनाव हुआ है। इस चुनाव में जीतन राम की बहू दीपा मांझी को जीत मिली। हम की उम्मीदावार दीपा मांझी ने राजद के रौशन कुमार को 5,963 वोट से मात दी। दीपा मांझी को कुल 53,435 मिले। वहीं, रौशन कुमार को 47,490 वोट से संतोष करना पड़ा।
 

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