आज सावन के दूसरे सोमवार को शिवभक्त भगवान शंकर की पूजा-अर्चना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। हिन्दू धर्म शास्त्रों के मुताबिक शिव कृपा पाने का सबसे आसान उपाय रुद्राक्ष धारण करना है क्योंकि माना जाता है कि रुद्राक्ष में स्वयं भगवान शिव का तत्त्व विराजमान होता है। शिव पुराण और पद्म पुराण में कहा गया है कि रुद्राक्ष धारण करने मात्र से अधम व्यक्ति भी अपने जीवनकाल के अंत में स्वर्ग प्राप्त करता है। वहीं, अनेक वैज्ञानिक शोधों में भी इस बात के प्रमाण मिले हैं कि रुद्राक्ष धारण करने से तनाव, उच्च रक्तचाप, पीठ दर्द, गर्दन में दर्द, पैरों में दर्द और ह्रदय रोग जैसी परेशानियों से मुक्ति पाने में मदद मिलती है और व्यक्ति शांत और प्रसन्नचित्त रहता है। इसलिए जिस व्यक्ति को धार्मिक आस्था न भी हो, उसे रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। शास्त्रों में किसी भी धर्म, जाति और लिंग के व्यक्ति को रुद्राक्ष धारण करने की सलाह दी गई है।
रुद्राक्ष हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाने वाले एक वृक्ष के बीज होते हैं जिनमें प्राकृतिक रूप से छिद्र होते हैं। इन छिद्रों की संख्या के आधार पर एक मुखी रुद्राक्ष से लेकर 21 मुखी रुद्राक्ष तक प्राप्त होते हैं। मनवांछित फल की प्राप्ति के लिए अलग-अलग देवों की आराधना के लिए अलग-अलग प्रकार के रुद्राक्ष धारण करने की सलाह दी जाती है। इनमें एक मुखी रुद्राक्ष को बहुत लाभकारी माना जाता है क्योंकि इसे धारण कर भगवान शिव की पूजा की जाती है। हालांकि यह काफी दुर्लभ होता है। लेकिन रुद्राक्ष की ऐसी माला जिसमें एक मुखी रुद्राक्ष से लेकर 21 मुखी रुद्राक्ष तक सभी मनके शामिल होते हैं, उसे सबसे ज्यादा फलदायी माना जाता है। इसे ‘इंद्रमाला’ कहा जाता है। 21 मनकों के आलावा इसमें सात अन्य मनके भी होते हैं। यह अति दुर्लभ और सबसे महंगा भी होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक नेपाल के क्षेत्र में पाए जाने वाले असली रुद्राक्ष से बनी इंद्रमाला की कीमत आज के बाजार में ढाई से तीन करोड़ रुपये होती है। कहा जाता है कि पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी इसी प्रकार की रुद्राक्ष की माला पहनती थीं।
अलग-अलग रुद्राक्ष
रुद्राक्ष पर शोध कर रहे तनय सीठा के मुताबिक़ नेपाल में पाया जाने वाला रुद्राक्ष सबसे बेहतर क्वालिटी का माना जाता है क्योंकि इनमें प्राकृतिक रूप से छिद्र होते हैं। कम उपलब्धता और ज्यादा मांग के कारण इनकी कीमत आजकल बढ़ती जा रही है। उन्होंने बताया कि भगवान शिव की पूजा कर उनसे इच्छित लाभ लेने के लिए एक मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। दो मुखी रुद्राक्ष को धारण कर भगवान शंकर के ही अर्धनारीश्वर स्वरूप की पूजा करनी चाहिए। तीन मुखी रुद्राक्ष आदि देवी के लिए, चार मुखी रुद्राक्ष ब्रह्मा के लिए, सात मुखी शनि या लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए, नौ मुखी रुद्राक्ष देवी दुर्गा के लिए, दस मुखी रुद्राक्ष भगवान विष्णु के लिए और बारह मुखी रुद्राक्ष भगवान सूर्य के लिए धारण करना चाहिए। हनुमान को प्रसन्न करने के लिए चौदह मुखी रुद्राक्ष, भगवान राम को प्रसन्न करने के लिए 16 मुखी रुद्राक्ष और धन के देवता कुबेर को प्रसन्न करने के लिए 21 मुखी रुद्राक्ष धारण कर इन देवताओं की पूजा करनी चाहिए। नेपाल के आलावा इंडोनेशिया में भी रुद्राक्ष पाए जाते हैं, लेकिन ये आकार में छोटे होते हैं।
धार्मिक कारण
धर्म शास्त्रों के मुताबिक त्रिपुरा राक्षस के वध के लिए भगवान शिव को अघोरा अस्त्र की आवश्यकता थी। इसके लिए उन्होंने एक हजार वर्ष तक खुली आंखों के साथ तपस्या की। इसके बाद जब उन्होंने नेत्र बन्द किए तब उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े। जिन स्थानों पर ये आंसू गिरे, वहीं रुद्राक्ष के वृक्ष पैदा हुए। इन पेड़ों के बीजों को ही रुद्राक्ष के रूप में धारण किया जाता है।
रुद्राक्ष पर शोध
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के छात्र तनय सीठा ने बताया कि अब वे अपना पूरा समय रुद्राक्ष के विषय पर शोध करने में दे रहे हैं। उनके अनुरोध पर इंस्टिट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नॉलोजी, मुंबई में एक शोध चल रहा है जिसमें रुद्राक्ष के शरीर पर पड़ने वाले असर का गंभीर विश्लेष्ण किया जा रहा है। शोध के प्रारंभिक परिणाम इस बात की ओर इशारा करते हैं कि रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति को तनाव, उच्च रक्त चाप, हृदय रोग और अनेक दर्द से मुक्ति मिलती है। रुद्राक्ष को पानी को शुद्ध करने वाला तत्त्व भी बताया गया है। जग में पानी भरकर उसमें रुद्राक्ष के कुछ दाने डाल देना चाहिए। तीन से चार घंटे के बाद इस पानी को पीने से शरीर रोगों से मुक्त रहता है। तनय सीठा की वेबसाइट rudralife.com पर रुद्राक्ष से जुड़ी कोई भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
आज के लाइफ स्टाइल में शूगर सबसे बड़ी बीमारी बनकर उभरी है। इसकी चपेट में बड़े बुजुर्ग ही नहीं, युवा और बच्चे तक आ रहे हैं। शोध में इस बात का संकेत मिला है कि रुद्राक्ष धारण करने और अपनी दिनचर्या को सुधारने से शूगर से भी मुक्ति मिल सकती है। रुद्राक्ष पहनने से नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है, लेकिन स्वयं इसको पहनने से किसी तरह का नुक्सान नहीं होता है।
रुद्राक्ष धारण करने के लिए सावन का महीना सबसे उपयुक्त माना जाता है। इसे किसी भी धातु के माले के साथ या किसी धागे की सहायता से पहना जा सकता है। महिलाएं, बच्चे या युवा किसी को भी रुद्राक्ष के धारण करने से किसी प्रकार का विरोध नहीं है।