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अमेरिका की तरह भारत में भी सिरदर्द बने 'भेदिया कारोबारी', नकेल कसने को बनेगी स्पेशल टीम

Tue, 18 Jun 2019 05:41 PM IST
Nilesh Kumar न्यूज डेस्क, नई दिल्ली
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इनसाइडर ट्रेडिंग पर लगाम लगाना चाहती है सेबी - फोटो : अमर उजाला
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अमेरिका और दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत में भी 'भेदिया कारोबारी' सिरदर्द बनते जा रहे हैं। शेयर बाजार से जुड़े लोग इनकी सहायता से कंपनी के 'भेद' जानकर ट्रेडिंग का फायदा उठाते हैं, कई गुना ज्यादा मुनाफा कमाते हैं और दूसरी ओर सामान्य व ईमानदार ट्रेडर्स को बड़ा घाटा उठाना पड़ता है। 

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भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने भेदिया कारोबारी (इनसाइडर ट्रेडर्स) से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए जांच आयोग को स्पेशल टीम बनाने को कहा है। इनसाइडर ट्रेडिंग ( Insider Trading ) कोई नया शब्द नहीं है, शेयर बाजार से जुड़े लोग इसे अच्छी तरह जानते हैं। कई शेयर कारोबारी इस तरह की ट्रेडिंग से फायदा कमाते हैं तो कई को घाटा उठाना पड़ता है।

ऐसा भी नहीं है कि अमेरिका में ही इनसाइडर ट्रेडिंग के मामले सामने आते हैं। भारत में भी कई बार ऐसे मामले सामने आते रहे हैं। यह दुनिया के कई देशों के लिए चुनौती बना हुआ है और इस पर लगाम लगाना बहुत मुश्किल है।
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शेयर बाजार में सामान्य निवेशकों को इससे सख्त नफरत है, जबकि बहुत सारे ऐसे निवेशक होते हैं, जिनके लिए यह सामान्य घटना है। वहीं, शेयर बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि कई ऐसे लोग सिर्फ इसलिए कई गुना ज्यादा पैसे कमा लेते हैं, क्योंकि उन्हें पहले से ही 'अंदर की खबर' होती है।

भेदिया कारोबार क्या है, कैसे होती है इनसाइडर ट्रेडिंग?

किसी कंपनी में ऊंचे स्तर पर जुड़ा व्यक्ति अंदरूनी जानकारी या गोपनीय सूचना के आधार पर शेयर की खरीद-बिक्री करके या दूसरों से करवाकर गलत तरीके से मुनाफा कमाता है, तो इसे भेदिया कारोबार (इनसाइडर ट्रेडिंग) कहा जाता है। कंपनी की गोपनीय सूचनाएं किसी दूसरे को बेचना और या फिर उनके आधार पर मार्केट में गलत तरीके से कारोबार कर किसी को फायदा पहुंचाना इनसाइडर ट्रेडिंग के अंतर्गत आते हैं। 

एक उदाहरण से ऐसे समझिए कि किसी कंपनी ने दिवाली पर अपने शेयर धारकों को बोनस शेयर देने का निर्णय लिया या फिर उन्हें कंपनी को हुए लाभ का 15 फीसदी लाभांश देने का निर्णय लिया (जैसा कि कंपनियां समय-समय पर करती रहती हैं), तो इसकी जानकारी बोर्ड के सदस्यों को ही होगी। 

अब बोर्ड का कोई सदस्य यह जानकारी ट्रेडर्स को दे देता है और ट्रेडर्स ज्यादा से ज्यादा शेयर खरीद लेता है, ताकि लाभांश की स्थिति में या फिर शेयर की कीमत बढ़ने पर उसे बेचकर मोटा पैसा कमा सके। ऐसी स्थिति में सामान्य शेयर धारकों को काफी नुकसान होता है। 

फोन टेपिंग की इजाजत मांग रहा सेबी

इनसाइडर ट्रेडिंग पर लगाम लगाने वाले सेबी के फैसलों को अदालतों या 'पंचाट' में चुनौती दी जाती है तो वहां मामले कई वर्षों तक लटके रहते हैं या फिर उनमें नियामक के खिलाफ ही फैसला आ जाता है। कुछ साल पहले मनोज गौड़ के खिलाफ आदेश को प्रतिभूति अपीलीय पंचाट ने सबूतों के अभाव में पलट दिया था। दुनिया के दूसरे नियामकों की तरह भारतीय प्राधिकरण भी इस मामले में खुद को कमजोर पाता है। 

सेबी इससे निपटने के लिए सरकार से फोन रिकॉर्डिंग की इजाजत मांग रहा है। हालांकि इस अधिकार के बिना भी सेबी अपनी तरफ से पूरी कोशिशों में लगा है ताकि इस समस्या का हल तलाशा जा सके और दोषियों की पहचान कर उन्हें सजा दी जा सके। 

सेबी ने नियम सख्त किए

सेबी की रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान नियामक ने भेदिया कारोबार के 147 मामलों की जांच की थी, जिसमें 117 पर निर्णय भी लिया गया। सेबी के पास जितने मामले आए थे उनमें से करीब 51 फीसदी मामले भेदिया कारोबार से जुड़े थे। भेदिया कारोबार के खिलाफ सेबी ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। 20 साल पुराने नियमों में बदलाव लाते हुए इसके नियम कड़े किए गए हैं। 
साल 2011 में प्रतिभूति नियमों के उल्लंघन पर रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेस को 25-25 करोड़ रुपये का हर्जाना भरना पड़ा था। ऑर्किड केमिकल्स के शेयरों के बारे में जानकारी देने के मामले में रैनबैक्सी के पूर्व स्वतंत्र निदेशक वी के कौल और उनकी पत्नी पर 60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। जेपी समूह की इंजीनियरिंग व निर्माण इकाई जयप्रकाश एसोसिएट्स (जेएएल) के अध्यक्ष मनोज गौड़ और उनके रिश्तेदारों के अलावा तीन वरिष्ठ अधिकारियों को भी कंपनी के शेयरों के भेदिया कारोबार में शामिल होने की वजह से 2008 में 70 लाख का जुर्माना लगाया था। 

इतने के बावजूद इनसाइडर ट्रेडिंग की जांच में कई मुश्किलें

इनसाइडर ट्रेडिंग के मामले कई सालों से परेशान किए हुए है। दुनियाभर की जांच एजेंसियों और नियामकों के लिए इसका भेद जानना बहुत बड़ी चुनौती है। अदालतों में इन मामलों को मजबूती के साथ पेश कर पाना तो और भी मुश्किल होता है। भेदिया कारोबार की जांच में तीन बुनियादी बिंदुओं पर खासा जोर होता है। 
  • जांच एजेंसी को यह साबित करना पड़ता है कि बाजार में खरीद या बिक्री के रूप में कोई उठापठक हुई भी है या नहीं?
  • यह साबित करना होता है कि भेदिये के पास कोई ऐसी खास और गुप्त जानकारी थी, जो दूसरों के पास नहीं थी। 
  • इसके बाद इस गुप्त जानकारी के प्रभाव साबित करने होते हैं। जांचकर्ता के लिए सबसे बड़ी मुसीबत यही होती है। 
यहां तक कि अमेरिका में राज राजारत्नम, रजत गुप्ता जैसे मशहूर मामले में भी यह स्पष्ट नहीं है कि अगर जांचकर्ताओं के पास उनकी बातचीत का ब्योरा नहीं होता तो क्या वे मामले को इतनी मजबूती के साथ पेश कर पाते। आमतौर पर भेदिया कारोबार के खुलासे के लिए फोन टैपिंग की इजाजत नहीं होती।
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जेल की हवा खा चुके हैं कई इनसाइडर ट्रेडर

इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोप में कई नामी-गिरामी लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। कइयों पर बड़ा जुर्माना ठोका जा चुका है तो कइयों को जेल भी जाना पड़ा है। बावजूद इसके इनसाइडर ट्रेडिंग पर नकेल नहीं कसी जा सकी है। सेबी के कई प्रयास नाकाफी साबित हुए हैं और इसलिए सरकार से फोन टेपिंग की इजाजत मांगी जा रही है।

इनसाइडर ट्रेडर्स के मामले और आरोपी 

  • राज राजारत्नम : श्रीलंकाई मूल के अमेरिकी कारोबारी राज राजारत्नम को साल 2009 में एफबीआई ने इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोप में गिरफ्तार किया था। 2011 में उसे 11 साल की जेल हो गई थी। राजारत्नम ने अपने नेटवर्क का इस्तेमाल कर कई कंपनियों की जानकारियां जुटा कर करोड़ों डॉलर कमाए थे। 
  • रजत गुप्ता : वॉल स्ट्रीट में सफल भारतीय अमेरिकियों में शामिल रजत गुप्ता इनसाइडर ट्रेडिंग के मामले में जेल जा चुके हैं। उसने गैलियन हेज फंड के संस्थापक राज राजारत्नम को कारोबार से जुड़ी कई गोपनीय सूचना पहुंचाई थी। 
  • डेनिस लैवेनी : इन्वेस्टमेंट बैंकर डेनिस लैवेनी ने साल 1986 में इनसाइडर सूचना का फायदा उठाते हुए नैबिस्को के टेकओवर सौदे में 26.9 लाख डॉलर कमाए थे। उसकी लीक की गई सूचना पर शेयर कारोबारी इवान बोएस्की ने भी पांच करोड़ डॉलर से अधिक कमाए थे। 
  • जोसेफ कोन्टोरिनिस : जेफरीज इंक के पूर्व पोर्टफोलियो मैनेजर जोसेफ कोन्टोरिनिस ने एक इन्वेस्टमेंट बैंकर से मिली जानकारी के आधार पर 70 लाख डॉलर की इनसाइडर ट्रेडिंग को अंजाम दिया था। वर्ष 2010 में उन्हें इसके लिए छह साल जेल की सजा मिली थी।
  • डेनियल चिजी : ब्यूटी क्वीन रह चुकीं न्यू कैसल फंड की पूर्व कंसल्टेंट डेनियल चिजी को जुलाई 2011 में इनसाइडर ट्रेडिंग का दोषी पाया गया था। वह दूसरों को गुप्त सूचनाएं पहुंचाती थी। उसे ढाई साल की जेल हुई थी।
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