अब दोबारा से घाटी के शांत माहौल को बिगाड़ने की कोशिश हो रही है। पाकिस्तानी आईएसआई का प्रयास है कि वह तालिबान लड़ाकों को साथ लेकर घाटी के युवाओं को आतंक के रास्ते पर चलने के लिए तैयार करे। इसके लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया जा रहा है। जिहाद के नाम पर युवाओं को गुमराह कर उन्हें बंदूक थमा दी जाएगी। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, सोशल मीडिया पर नजर रखी जा रही है। तालिबानी लड़ाकों के ऐसे वीडियो, जिनमें उनके पास अमेरिकी हथियार हैं, उन्हें ही अधिक वायरल किया जा रहा है। इन्हें देखकर युवा कुछ प्रतिक्रिया दें। ऐसे मामलों को पकड़ने के लिए हर जिले में साइबर इकाई काम कर रही है। किस समूह से वीडियो चला है, उसे ट्रैक किया जा रहा है। डीजीपी दिलबाग सिंह का कहना है, पुलिस की नजरों में, वे सबसे बुरी किस्म के आतंकवादी होते हैं, जो गुमनाम रहते हैं। ऐसे लोग बिना सामने आए युवाओं को बरगलाते हैं। सोशल मीडिया पर झूठ बोला जाता है। आतंकवाद का प्रोत्साहन मिले, ऐसी बातें सोशल मीडिया में फैलाई जाती हैं। पिछले दिनों ऐसे ही पांच संदिग्ध जिहादियों को गिरफ्तार किया गया था।
केंद्र से जम्मू-कश्मीर पुलिस में गए एक दूसरे अधिकारी बताते हैं, अभी स्थिति नियंत्रण में है। सीमा पर भी और घाटी के भीतरी इलाकों में भी आतंकियों पर नकेल कसी जा रही है। आतंकियों की नई भर्ती पर रोक लगी है। स्मार्टफोन के गलत इस्तेमाल को लेकर पुलिस सचेत है। आईएसआई के सफेदपोश मददगार, ओवर ग्राउंड व अंडरग्राउंड वर्करों को भी बाहर निकाला जा रहा है। इंटरनेट पर नजर रखने के लिए विभिन्न जिलों में वालंटियर भर्ती किए जा रहे हैं। ये पुलिस की मदद करेंगे। इनका काम इंटरनेट पर नजर रखना है। कोई भी गलत वीडियो या तोड़फोड़ वाला मैसेज अगर वायरल होता है तो उसकी सूचना जांच एजेंसियों को दे दी जाएगी।
केंद्रीय सुरक्षा बलों के एक अधिकारी ने कहा, पाकिस्तान के साथ तालिबान अपने लड़ाके भेजेगा, अभी ये दूर की बात है। हालांकि जैश ए मोहम्मद को लेकर हम विशेष तौर पर सक्रिय हैं। बॉर्डर से अब निकलना बहुत मुश्किल है। स्मार्ट फेंसिंग पर काम चल रहा है। सैटेलाइट इमेज को लेकर भी एजेंसियां अपने प्रोजेक्ट पर लगी हैं। घाटी में अर्धसैनिक बलों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। इस बाबत केंद्रीय गृह मंत्रालय में बैठक हुई है। उसके मिनट्स आने के बाद सुरक्षा बदलाव किए जा सकते हैं।