महेंद्र नाथ पांडे और अजय मिश्रा
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कुछ दिन पहले तक केंद्रीय कैबिनेट में उत्तर प्रदेश से बड़े ब्राह्मण चेहरे के तौर पर महेंद्र नाथ पांडे का नाम हुआ करता था। अब तस्वीर बदल गई है। महेंद्र नाथ पांडे के साथ एक नया नाम अजय मिश्रा का भी जुड़ गया है। उत्तर प्रदेश के कुर्मी और ब्राह्मण बाहुल्य इलाके लखीमपुर खीरी से आने वाले ब्राह्मण नेता अजय मिश्रा को केंद्र में मंत्री बनाया गया है। अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव हैं। केंद्रीय कैबिनेट में जगह पाने वाले मिश्रा और पांडे की जोड़ी उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में कितनी रंगत बिखेरेगी, इस पर केंद्रीय आलाकमान पूरी तरह से नजरें गड़ाए हुए है। न सिर्फ नए मंत्री अजय मिश्रा बल्कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके महेंद्र नाथ पांडे को भी ब्राह्मणों को अपनी ओर जोड़ने की अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा।
बड़े ब्राह्मण चेहरे के तौर पर खुद को प्रोजेक्ट करना होगा
उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों के नए नेता के नाम पर अचानक एक नया नाम अजय मिश्रा का जुड़ गया है। ब्राह्मण चेहरे के नाम पर अजय मिश्रा को केंद्र में मंत्री बनाया गया और बहुत अहम गृह विभाग में राज्यमंत्री का दर्जा भी दिया गया। क्योंकि प्रदेश में पुराने भाजपा ब्राह्मण चेहरों के बीच में अजय मिश्रा एक नया नाम है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में अब अजय मिश्र को बड़े ब्राह्मण चेहरे के तौर पर खुद को भी प्रोजेक्ट करना होगा और पार्टी को उनका साथ देना होगा।
दरअसल अजय मिश्रा उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। यह क्षेत्र पूरे प्रदेश में कुर्मी बाहुल्य इलाके के तौर पर पहचाना जाता है। देश की आजादी के बाद उत्तर प्रदेश की इसी लोकसभा सीट से कभी केंद्रीय मंत्री रहे बाल गोविंद वर्मा और उनके परिवार की तीन पीढ़ियां लगातार संसद में प्रतिनिधित्व करती रहीं। अजय मिश्रा इसी पीढ़ी को हरा कर ब्राह्मण चेहरे के तौर पर जीते। लखीमपुर खीरी और आसपास के जिलों तक उनको ब्राह्मणों का नेता माना जाता रहा। लेकिन पूरे प्रदेश में उनकी उतनी पहचान बतौर ब्राह्मण नेता नहीं बन सकी। अब जातिगत समीकरणों के आधार पर अजय मिश्रा को उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों के नए चेहरे के तौर पर सामने लाया गया है तो यह बड़ी चुनौती भी उनके लिए है। क्योंकि प्रदेश में पहले से ही ब्राह्मणों के कई नाम हैं जो न सिर्फ अपने-अपने इलाकों में अच्छी पैठ रखते हैं बल्कि प्रदेश में भी एक बड़े और अनुभवी चेहरे के तौर पर पहचाने जाते हैं।
कहने के लिए तो उत्तर प्रदेश सरकार में भी कई ब्राह्मण चेहरे हैं। संगठन में भी ब्राह्मण चेहरों की कोई कमी नहीं है। लेकिन हमेशा से इस बात को तवज्जो दी जाती रही है कि किस राज्य से जातिगत समीकरणों के आधार पर कितने चेहरे केंद्र की कैबिनेट में हैं। उत्तर प्रदेश से ब्राह्मणों के चेहरे के नाम पर केंद्र की कैबिनेट में इस वक्त महेंद्र नाथ पांडे का नाम शामिल था। उत्तर प्रदेश में महेंद्र नाथ पांडे ब्राह्मणों के न सिर्फ बड़े चेहरे रहे बल्कि प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में केंद्र में राज्य के दो ब्राह्मण चेहरे होने से निश्चित तौर पर उत्तर प्रदेश में नाराज ब्राह्मणों को मनाना सबसे बड़ा मकसद भी है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के मुताबिक आगामी विधानसभा चुनाव में 'मिश्रा-पांडे की जोड़ी' ब्राह्मणों को कितना करीब से समझेगी और उन्हें कितना पार्टी के साथ ज्यादा से ज्यादा जोड़ पाएंगे, यही उनका आकलन भी होगा।