महाराष्ट्र में गर्मा रही सियासत के बीच केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी ने पूर्व मंत्री व राकांपा नेता एकनाथ खडसे पर शिकंजा कस दिया है। बुधवार को जारी समन पर खडसे गुरुवार को जांच एजेंसी के समक्ष पूछताछ के लिए पेश हुए। इसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया। पुणे के जमीन घोटाले में उनके दामाद को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस बीच महाराष्ट्र राकांपा अध्यक्ष जयंत पाटिल ने आरोप लगाया है कि भाजपा साजिश रच रही है। केंद्रीय जांच एजेंसियां खडसे को प्रताड़ित कर रही हैं।
खडसे के वकील मोहन टेकवडे ने बताया कि ईडी के अधिकारी जब बुलाएंगे खडसे पेश होंगे। हमने ईडी से कहा कि हम नियमित रूप से पेश होंगे। हमने लेनदेन व जमीन सौदे को लेकर सारे दस्तावेज सौंप दिए हैं। कुछ और दस्तावेज अगले 10 दिन में सौंप दिए जाएंगे।
खड़से के खिलाफ ईडी के केस को लेकर जयंत पाटिल ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि खडसे जांच में बेदाग निकलेंगे। भाजपा उन्हें प्रताड़ित करने के चाहे जो षड्यंत्र रचे, लेकिन वह खरे साबित होंगे। जांच के तथ्यों में कोई दम नहीं है। इस जमीन के मामले में फैसला आ चुका है कि वह वैध तरीके से खरीदी गई।
बता दें ईडी ने मंगलवार रात को खडसे के दामाद गिरीश चौधरी को इस मामले में गिरफ्तार किया है। उन्हें बुधवार को विशेष पीएमएलए अदालत ने 12 जुलाई तक के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया है। अधिकारियों ने आरोप लगाया कि चौधरी पूछताछ के दौरान सहयोग नहीं कर रहे थे।
खड़से ने पिछले साल छोड़ी थी भाजपा
खडसे (68) ने पिछले साल महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) में शामिल होने के लिए भारतीय जनता पार्टी छोड़ दी थी। खडसे ने इसी भूमि सौदे और कुछ अन्य मुद्दों के संबंध में आरोपों का सामना करने के बाद 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाले महाराष्ट्र मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। उस वक्त वे राजस्व मंत्री थे।
खड़से पर यह है आरोप
आरोप है कि पुणे के भोसारी इलाके में खडसे ने अपने परिवार को महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआईडीसी) की सरकारी जमीन खरीदने में मदद करने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया था। महाराष्ट्र के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के साथ ही आयकर विभाग ने उन्हें मामले में क्लीन चिट दे दी थी। यह मामला मई 2016 का है जब पुणे के एक कारोबारी हेमंत गवांडे ने शहर के बुंद गार्डन पुलिस थाने में एक शिकायत दर्ज कराई थी।