भारतीय विदेश सेवा से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि आधिकारिक तौर पर तो दुनिया के ज्यादातर मुल्कों में दूतावासों को बंद नहीं किया गया है लेकिन वह पूरी तरीके से निष्क्रिय जरूर हो चुके हैं। वह कहते हैं कि बड़े देशों के दूतावासों में काम करने वाले ज्यादातर अधिकारी और उनके परिवार की दोहरी नागरिकता होती है। ऐसे में उनके पास उसी मुल्क में शरण लेने का एक विकल्प भी रहता है। उनका कहना है ज्यादातर निष्क्रिय और बंद हो चुके अफगानी दूतावास के अधिकारियों ने उसी देश में पनाह ले ली है। अब इन मुल्कों में अफगानी दूतावासों को दोबारा कब शुरू किया जाएगा, इसके सवाल पर उक्त अधिकारी का कहना है एक बार अफगानिस्तान में सरकार का गठन हो जाए, उसके बाद दुनिया भर के डिप्लोमेटिक रिश्तों को चलाने के लिए तालिबान अपने स्तर पर बातचीत शुरू करेगा। जो देश तालिबान के रिश्तों को चलाना चाहेंगे, वही देश अपने मुल्कों में दूतावासों को फिर से सक्रिय करेंगे अन्यथा उस देश के दूतावास पूरी तरीके से बंद हो जाएंगे।
अफगानिस्तान में सत्ता पर काबिज हुए तालिबानियों ने दुनिया के देशों से अपील की है कि वह अपने देशों के दूतावासों को अफगानिस्तान में दोबारा शुरू करें। तालिबानी प्रवक्ता ने अपने एक बयान में कहा है कि उनकी सरकार को दुनिया के देश मान्यता दें और दूतावासों को शुरू कर सरकार को सामान्य रूप से चलाने की आम सहमति भी मिले। विदेशी मामलों के विशेषज्ञों का कहना है तालिबानियों की सरकार को हो सकता है कुछ देश स्वीकार कर लें, लेकिन ज्यादातर देशों ने अभी भी न अपने दूतावासों को अफगानिस्तान में शुरू करने की योजना बनाई है और न ही अफगानिस्तान के दूतावासों को अपने देशों में सक्रिय करने की कोई योजना है।