इस बार के 2022 अकादमी पुरस्कारों के लिए भारत की प्रविष्टि, तमिल फिल्म कूझंगल, भी इस बार फीचर श्रेणी में प्रदर्शित की जाएगी, इस बार इस सेक्शन में क्षेत्रीय भाषाओं मराठी और बंगाली फिल्मों का वर्चस्व है। अभिनेता परमब्रत चट्टोपाध्याय के निर्देशन में बनी फिल्म अभिजान, पांच बंगाली फिल्मों में शामिल है, जबकि मराठी फिल्मों में गोदावरी, फ्यूनरल और बिटरस्वीट जैसी विशेषताएं शामिल हैं।
इस खंड में चार कन्नड़ फिल्में भी हैं। दो मलयालम फिल्मों के अलावा हिंदी भाषा की फिल्में आठ डाउन तूफान मेल और अल्फा बीटा गामा हैं।भारतीय पैनोरमा के गैर-फीचर खंड के लिए प्रविष्टियों का चयन वृत्तचित्र फिल्म निर्माता एस नल्लामुथु की अध्यक्षता वाली जूरी द्वारा किया गया था।
यह फिल्म फिल्म निर्माता वेद प्रकाश और उनके द्वारा किए गए कामों को 1939-1975 तक कालखंड को दर्शाती है। यह भारतीय सिनेमा और बदलते घटनाक्रम को कड़ी दर कड़ी दर कड़ी पिरोकर फिल्मांकन करके दुनिया को जीतने की उनकी यात्रा की कहानी बंया करती है।
इसमें वेद द्वारा किए गए असाधारण कार्यों की कहानी में देश की आजादी के दंश और ऐतिहासिक समझौते के अलावा जनवरी 1948 में महात्मा गांधी के अंतिम संस्कार का समाचार कवरेज शामिल है, जिसे 1949 में ब्रिटिश अकादमी पुरस्कारों के लिए नामांकित किया गया था।
भारत के स्वतंत्र संग्राम और इसके बाद आजाद भारत में मुल्क के बंटवारे से लेकर हुए सत्ता परिवर्तन के दौरान हुई त्रासदी को संवेदनाओं के साथ किस तरह से संजोया गया था उसकी बानगी पेश करता है। दृश्यों का एक बड़ा हिस्सा और इसके अशांत प्रारंभिक वर्षों में उनकी कड़ी मेहनत और सौंदर्यशास्त्र का उपहार है।
सेमखोर
नारी की अनंत वेदना, सामाजिक दुश्वारियों और जीने की ललक के साथ बेटी को हर हाल में सुनहरा भविष्य देने के लिए बेटी को खोने वाली मॉ और एक बालिका शिशु को जीवन देने के लिए संघर्ष करने वाली नानी की गाथा है। इसमें डिरो सेमखोर के संसा समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। जब डिरो की मृत्यु होती है, तो उसकी पत्नी, जो एक सहायक मिड-वाइफ के रूप में काम करती है, अपने तीन बच्चों की देखभाल करती है।
वह अपनी इकलौती बेटी मुरी, केवल ग्यारह साल की उम्र में, दीनार से शादी कर लेती है। दुर्भाग्य से, एक बच्ची को जन्म देने के बाद मुरी की मृत्यु हो जाती है। सेमखोर की प्रथा के अनुसार, यदि बच्चे के जन्म के दौरान किसी महिला की मृत्यु हो जाती है, तो शिशु को मां के साथ जिंदा दफना दिया जाता है। लेकिन डिरो की पत्नी सेमखोर में एक नई सुबह का संकेत देते हुए, मुरी के शिशु की रक्षा करती है।