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अपोलो 11 मिशन के 50 साल पूरे, जानिए चंद्रमा की पहली यात्रा के बारे में सबकुछ

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: शिल्पा ठाकुर Updated Fri, 19 Jul 2019 08:01 PM IST
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नासा के अपोलो मिशन के पहले तीन अंतरिक्ष यात्री - फोटो : social media

50 वर्ष पहले अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपोलो-11 मिशन के तहत पहली बार चंद्रमा पर किसी इंसान को भेजा था। इस मिशन के साथ ही नील आर्मस्ट्रांग चंद्रमा पर पहुंचने वाले पहले व्यक्ति बने थे। आर्मस्ट्रांग के कुछ मिनट बाद एडविन 'बज' एल्ड्रिन ने चंद्रमा की धरती पर कदम रखा था। तीसरे अंतरिक्ष यात्री माइकल कॉलिंस ने ऑरबिट पायलट की जिम्मेदारी संभाली थी।

अपोलो-11 का उद्देश्य था इसमें सवार तीनों अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग, एडविन 'बज' एल्ड्रिन और माइकल कॉलिंस को सुरक्षित चंद्रमा पर पहुंचाने के बाद वापस पृथ्वी पर लाना। माइकल कॉलिंस बतौर पायलट अपोलो-11 में मौजूद थे। वहीं, नील आर्मस्ट्रांग और एडविन 'बज' एल्ड्रिन चंद्रमा की जमीन पर उतरे थे।



20 जुलाई 2019 को नील आर्मस्ट्रांग और एडविन एल्ड्रिन को चंद्रमा पर पहुंचे 50 साल पूरे हो जाएंगे। अपोलो-11 अंतरिक्ष यान को 1969 में अमेरिका के कैनेडी स्पेस सेंटर लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39A से सुबह 08:32 बजे लॉन्च किया गया था। जिस लूनर मॉड्यूल से ये दोनों अंतरिक्ष यात्री अपोलो-11 से निकलकर चंद्रमा तक पहुंचे उसे 'द ईगल' नाम दिया गया था।

ये दोनों अंतरिक्ष यात्री 21 घंटे 31 मिनट तक चंद्रमा पर रुके थे। एडविन एल्ड्रिन ने नील आर्मस्ट्रांग के 19 मिनट बाद चंद्रमा पर कदम रखा था। दोनों ने अंतरिक्ष यान पर 2 घंटे 15 मिनट बिताए थे। लेकिन आर्मस्ट्रांग और एडविन के लिए चंद्रमा तक पहुंचने का ये सफर आसान नहीं था। सबसे पहले दोनों अंतरिक्ष यात्रियों का पृथ्वी से रेडियो संपर्क टूट गया था। इसके बाद ऑनबोर्ड कम्प्यूटर में कई एरर कोड्स आने लगे थे।

इतना ही नहीं, 'द ईगल' में ईंधन की कमी भी सामने आई थी। लेकिन नील आर्मस्ट्रांग और एडविन एल्ड्रिन दोनों ने मिलकर सफलतापूर्वक इन परेशानियों का सामना कर 20 जुलाई, 1969 को चंद्रमा पर लैंडिग की थी। नील आर्मस्ट्रांग अब दुनिया में नहीं हैं। 82 साल की उम्र में 25 अगस्त, 2012 को उनका देहांत हो गया था।

तीन अंतरिक्ष यात्रियों का यह दल चंद्रमा की सैर करने के बाद 24 जुलाई 1969 को वापस धरती पर लौट आया था। इनके यान की लैंडिंग प्रशांत महासागर में कराई गई थी। अपोलो-11 मिशन में दुनियाभर के 40 हजार लोगों ने अपनी भूमिकाएं निभाई थी।
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नासा के अपोलो मिशन के पहले तीन अंतरिक्ष यात्री - फोटो : social media
50 वर्ष पहले अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपोलो-11 मिशन के तहत पहली बार चंद्रमा पर किसी इंसान को भेजा था। इस मिशन के साथ ही नील आर्मस्ट्रांग चंद्रमा पर पहुंचने वाले पहले व्यक्ति बने थे। आर्मस्ट्रांग के कुछ मिनट बाद एडविन 'बज' एल्ड्रिन ने चंद्रमा की धरती पर कदम रखा था। तीसरे अंतरिक्ष यात्री माइकल कॉलिंस ने ऑरबिट पायलट की जिम्मेदारी संभाली थी।

अपोलो-11 का उद्देश्य था इसमें सवार तीनों अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग, एडविन 'बज' एल्ड्रिन और माइकल कॉलिंस को सुरक्षित चंद्रमा पर पहुंचाने के बाद वापस पृथ्वी पर लाना। माइकल कॉलिंस बतौर पायलट अपोलो-11 में मौजूद थे। वहीं, नील आर्मस्ट्रांग और एडविन 'बज' एल्ड्रिन चंद्रमा की जमीन पर उतरे थे।

20 जुलाई 2019 को नील आर्मस्ट्रांग और एडविन एल्ड्रिन को चंद्रमा पर पहुंचे 50 साल पूरे हो जाएंगे। अपोलो-11 अंतरिक्ष यान को 1969 में अमेरिका के कैनेडी स्पेस सेंटर लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39A से सुबह 08:32 बजे लॉन्च किया गया था। जिस लूनर मॉड्यूल से ये दोनों अंतरिक्ष यात्री अपोलो-11 से निकलकर चंद्रमा तक पहुंचे उसे 'द ईगल' नाम दिया गया था।

ये दोनों अंतरिक्ष यात्री 21 घंटे 31 मिनट तक चंद्रमा पर रुके थे। एडविन एल्ड्रिन ने नील आर्मस्ट्रांग के 19 मिनट बाद चंद्रमा पर कदम रखा था। दोनों ने अंतरिक्ष यान पर 2 घंटे 15 मिनट बिताए थे। लेकिन आर्मस्ट्रांग और एडविन के लिए चंद्रमा तक पहुंचने का ये सफर आसान नहीं था। सबसे पहले दोनों अंतरिक्ष यात्रियों का पृथ्वी से रेडियो संपर्क टूट गया था। इसके बाद ऑनबोर्ड कम्प्यूटर में कई एरर कोड्स आने लगे थे।

इतना ही नहीं, 'द ईगल' में ईंधन की कमी भी सामने आई थी। लेकिन नील आर्मस्ट्रांग और एडविन एल्ड्रिन दोनों ने मिलकर सफलतापूर्वक इन परेशानियों का सामना कर 20 जुलाई, 1969 को चंद्रमा पर लैंडिग की थी। नील आर्मस्ट्रांग अब दुनिया में नहीं हैं। 82 साल की उम्र में 25 अगस्त, 2012 को उनका देहांत हो गया था।

तीन अंतरिक्ष यात्रियों का यह दल चंद्रमा की सैर करने के बाद 24 जुलाई 1969 को वापस धरती पर लौट आया था। इनके यान की लैंडिंग प्रशांत महासागर में कराई गई थी। अपोलो-11 मिशन में दुनियाभर के 40 हजार लोगों ने अपनी भूमिकाएं निभाई थी।
 

नासा का मिशन अपोलो - फोटो : social media

चांद तक पहुंचने की यात्रा कैसे शुरू हुई

2 मई 1945ः दूसरा विश्व युद्ध समाप्ति की ओर था। इस बीच वॉनर वॉन ब्रॉन नाम के एक नाजी-जर्मन वैज्ञानिक ने अमेरिकी फौज के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। फौज उन्हें अमेरिका ले गई जहां वे बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के लिए काम करने लगे।

29 जुलाई 1958ः इस दिन राष्ट्रीय एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (National Aeronautics and Space Administration) एजेंसी नासा की स्थापना हुई थी। 1960 में वॉन ब्रॉन और उनकी टीम को इसमें शामिल कर लिया गया। इस टीम ने सैटर्न-5 नाम का प्रक्षेपण यान (लॉन्च व्हीकल) बनाया था। इसी प्रक्षेपण यान के जरिए अपोलो मिशन को चांद पर ले जाया गया था।

25 मई 1961ः अमेरिकी संसद को संबोधित करते हुए तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी ने कहा कि 1960 तक अमेरिका इंसान को चंद्रमा पर लेकर जाएगा और सुरक्षित वापस लेकर आएगा।

नासा का मिशन अपोलो - फोटो : File Photo

अपोलो मिशन-

अपोलो-1ः 27 जनवरी 1967 को प्री-लॉन्च परीक्षण के दौरान फ्लैश फायर की वजह से गुस ग्रिसम, एड व्हाइट और रॉजर शैफे की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद नासा ने अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को नए सिरे से जांचा।

अपोलो-7ः 11-12 अक्तूबर 1968 को वॉल्टर शिरा, वॉल्टर कनिंगघम और डॉन आइसल को लेकर पहला अपोलो मिशन पृथ्वी की कक्षा में 11 दिनों तक रहा।

अपोलो-8 मिशन - फोटो : social media
अपोलो-8ः 21-27 दिसंबर 1968 को फ्रैंक बॉर्मन, बिल एंडर्स और जिम लॉवेल को सैटर्न-5 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया था। यह दल चंद्रमा की कक्षा के आसपास रहा और एंडर्स ने पृथ्वी की विश्वविख्यात तस्वीर को क्लिक किया था।

अपोलो-9: 3-13 मार्च 1969 को जेम्स मैक्डीविट, रसेल शीकर्ट और डेविड स्कॉट पृथ्वी की कक्षा में रहे और अंतरिक्ष यान के मुख्य कमांड मॉड्यूल से लूनर मॉड्यूल के अलग होने का परीक्षण किया।

अपोलो-10: 18-26 मई 1969 को थॉमस स्टेफर्ड, यूजीन कर्नन और जॉन यंग ने चांद पर लैंडिंग की फुल रिहर्सल की थी। लूनर मॉड्यूल चांद की सतह के 16 किलोमीटर नजदीक तक गया था।

अपोलो-11 मिशन - फोटो : social media
अपोलो-11: 16-24 जुलाई 1969 को नील आर्मस्ट्रांग, एडविन 'बज' एल्ड्रिन और माइकल कॉलिंस चंद्रमा पर पहुंचे थे। आर्मस्ट्रांग चांद पर उतरने वाले पहले इंसान बने थे।

अपोलो-12: 14-24 नवंबर 1969 को चार्ल्स कोनर्ड, एलन बीन और रिचर्ड गोर्डन ने सर्वेयर-3 रॉकेट के टुकड़े खोजे और अंतरिक्ष यान की वजह से चंद्रमा के वातावरण पर पड़ने वाले प्रभावों की जांच की।

अपोलो-13 मिशन - फोटो : social media
अपोलो-13: 11-17 अप्रैल 1970 को जिम लॉवेल, फ्रेड हैज और जैक स्वीगर्ट की टीम चांद तक नहीं पहुंच सकी थी। दरअसल उनके यान में लगे ऑक्सीजन आपूर्ति टैंक में धमाका हो गया था, जिसके बाद यह सभी लूनर मॉड्यूल का उपयोग करके पृथ्वी पर वापस आ गए थे।

अपोलो-14 मिशन - फोटो : social media
अपोलो-14: 31 जनवरी से 9 फरवरी 1971 तक एलन शेफर्ड, एगर मिशेल और स्टुअर्ट रूसा की टीम ने चांद पर 2.7 किलोमीटर पर चहल-कदमी की और गोल्फ भी खेला।

अपोलो-15 मिशन - फोटो : social media
अपोलो-15: 26 जुलाई से 7 अगस्त 1971  को डेविड स्कॉट, जेम्स इर्विन और अल्फ्रड वॉर्डन की टीम लूनर रोवर के साथ चंद्रमा पर गए और वहां 27 किलोमीटर तक इसे चलाया।

अपोलो-16: 16-27 अप्रैल 1972 को जॉन यंग, चार्ल्स ड्यूक और केन मैटिंग्ली नासा का दूसरा रोवर मिशन लेकर चांद पर पहुंच थे। हालांकि तकनीकी समस्या के चलते इस मिशन की अवधि को कम कर दिया गया था।

अपोलो-17: 7-19 दिसंबर 1972 को सूगेन कर्नन, हैरिसन शिमिट, रोनल्ड एवान्स ने अपोलो के अंतिम मिशन में सात घंटों तक चंद्रमा पर चहलकदमी की थी। वह अपने साथ कुछ नूमने भी लेकर आए थे। इस मिशन और इससे पिछले मिशन के नमूने लगातार जरूरी जानकारी दे रहे हैं।

अपोलो-18 मिशन - फोटो : social media
अपोलो-18-20: बजट की कमी के चलते मिशन यहीं खत्म हो गया। पूरे 11 साल के मिशन में 25.4 बिलियन डॉलर का खर्च आया। जो आज की मुद्रा के अनुसार 160 बिलियन डॉलर से भी अधिक है।
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