सर्वे में सामने आया कि तीन में से एक किशोर साइबर बुलिंग (सोशल मीडिया पर किसी के द्वारा परेशान किया जाना) का शिकार है। साइबर क्राइम के बारे में जानकारी के अभाव के कारण ही किशोर इसकी चपेट में आ रहे हैं। साइबर बुलिंग का किशोरों पर शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक रूप से बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
इंटरनेट का प्रयोग सीमित समय के लिए करें
क्राई संस्था की उत्तरी क्षेत्र की निदेशिका सोहा मोइत्रा ने बताया कि उनकी संस्था काफी साल से बाल संरक्षण पर काम कर रही है। उन्होंने विशेषज्ञों से बातचीत कर बचाव के कुछ उपाय भी जारी किए हैं। इंटरनेट से बचाव पर विशेषज्ञों का कहना है कि किशोरों को उनके अभिभावकों की निगरानी में ही इंटरनेट का प्रयोग करने दिया जाना चाहिए।
अभिभावक को बच्चों को इंटरनेट के सुरक्षित प्रयोग के विषय में जानकारी देनी चाहिए, साथ ही बच्चों को निर्देश देना चाहिए कि इंटरनेट का प्रयोग सीमित समय के लिए करें। अभिभावकों को 18 साल से कम के बच्चों को इंटरनेट के प्रयोग के लिए स्मार्ट फोन नहीं देना चाहिए, बल्कि उनको घर के कंप्यूटर पर ही इंटरनेट का इस्तेमाल करने के लिए कहना चाहिए।