एजेंसी के अधिकारियों ने कहा कि वे फैसले का अध्ययन कर रहे हैं। जल्द ही शीर्ष अदालत में अपील दायर की जाएगी। पांच और छह दिसंबर 1993 की रात लखनऊ, कानपुर, हैदराबाद, सूरत और मुंबई में राजधानी एक्सप्रेस सहित लंबी दूरी की छह ट्रेनों में सिलसिलेवार विस्फोट हुए थे। इन धमाकों में दो लोगों की मौत हो गई थी और 22 लोग घायल हो गए थे।
ये सभी मामले सीबीआई को सौंप दिए गए थे। जिसने इस मामले में पांच अलग-अलग प्राथमिकियां दर्ज की थीं। जांच में पता चला था कि कई आतंकियों ने सरकार में खौफ पैदा करने, बड़े पैमाने पर सार्वजनिक रूप से आंतक फैलाने और देश के अलग-अलग हिस्से में चलने वाली ट्रेनों में बम विस्फोट जैसे कृत्यों को अंजाम दिया और देश के अलग-अलग समुदायों के बीच वैमनस्य पैदा करने के मकसद से आपराधिक साजिश रची।
सीबीआई ने 21 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था। जिसमें से 15 आरोपियों को बीस साल पहले 28 फरवरी 2004 को टाडा अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उच्चतम न्यायालय ने इनमें से दस दोषियों की सजा बरकरार रखी थी।
आतंकवादी दाऊद इब्राहिम का करीब सहयोगी टुंडा बाबरी मस्जिद विध्वंस की पहली बरसी पर विस्फोट करने के आरोपियों में से एक है। उसे 2013 में भारत-नेपाल सीमा के पास एक गांव से गिरफ्तार किया गया था। एजेंसी के प्रवक्ता ने कहा, 29 फरवरी 2024 को अजमेर की टाडा अदालत ने फैसला सुनाया, जिसके तहत हमीर-उल-उद्दीन और इरफान अहमद नाम के दोषियों को आजीवन कारावास सजा सुनाई गई और एक आरोपी टुंडा बरी कर दिया गया।