मां दुर्गा की झांकी के लिए तैयारी करते हुए।
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संतोषगढ़ (ऊना)। नगर परिषद संतोषगढ़ में लगभग आठ दशकों से दुर्गा अष्टमी मनाने की परंपरा कायम है। मान्यता है कि इस रोज लोगों को मां दुर्गा और भैरव नाथ के दर्शन होते हैं। दुर्गा अष्टमी के दिन पूरे नगर का माहौल भक्तिमय बना रहता है।
बुधवार को दुर्गा महाष्टमी के अवसर पर मां दुर्गा और भैरव नाथ की झांकी निकाली जाएगी। इसकी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। प्राचीन झांकी को रंग-रोगन कर नया रूप दिया जा रहा है। नगर देवता माने जाने वाले बाबा नांगा जी के समय से ही इस परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है।
लगभग आठ दशक पहले लकड़ी से बनी भव्य पालकी में मां दुर्गा और भैरव नाथ को उठाकर हजारों लोग शोभा यात्रा में शामिल होते हैं। नगर के ब्रहनंद की बैठक के नाम मशहूर स्थान से शोभा यात्रा शुरू होती है। शोभायात्रा का रोचक तथ्य यह है कि यहां खाली पालकी को 10 से 15 लोग आसानी से उठा लेते हैं। वहीं मां दुर्गा एवं भैरव नाथ को झांकी में बैठाने के बाद दैवीय शक्ति से पालकी का भार इतना बढ़ जाता है कि सैकड़ों लोगों के लिए भी झांकी को उठा पाना कठिन हो जाता है। दिन के साथ रात के वक्त में भी ग्राम देवता बाबा नांगा जी के समाधि स्थल पर मां दुर्गा और भैरव नाथ की झांकी निकाली जाती है। नगर के विक्रम चब्बा, रमेश चंद का कहना है कि कई दशकों से दुर्गा अष्टमी मानाने की परंपरा चली आ रही है।
इसे आज भी लोग श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। दुर्गा अष्टमी का पर्व मनाने के लिए नगर और समीपवर्ती गांवों के लोग इस दिन झांकी निकालने के लिए नगर में जुटते हैं। बाबा नागा ड्रामाटिक क्लब के प्रधान शिव कांत पराशर, निदेशक सरवन सैनी का कहना है कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 13 अक्तूबर को शाम पांच बजे माता रानी की झांकी निकाली जाएगी।