नारी (ऊना)। विद्यार्थियों के कोविड टीकाकरण के बाद मिले सुरक्षा कवच और नियमित ऑफलाइन कक्षाओं ने अभिभावकों को चिंतामुक्त कर दिया है। इससे पहले बिना किसी सुरक्षा कवच के स्कूलों में बच्चों को भेजने से अभिभावक कतरा रहे थे, लेकिन अब परिस्थितियां अलग हैं। बेझिक अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं।
नया सेशन शुरू होने के साथ स्कूलों में रौनक है। अभिभावक भी अब अपने बच्चों को घरों में रखने के बजाए खुले दिल के साथ स्कूल भेज रहे हैं। करीब दो साल तक ऑनलाइन पढ़ाई से परेशान अभिभावक व बच्चे अब स्कूल नियमित रूप से चलने से खुश हैं। 12 वर्ष से अधिक उम्र वर्ग वाले बच्चों को कोविड टीकाकरण का सुरक्षा कवच मिल गया है। ऐसे में अभिभावक कोविड को लेकर भी निश्चिंत हैं। 31 मार्च को परीक्षा परिणाम भी घोषित हो चुका है। विद्यार्थी भी अपने मित्रों संग स्कूल में मस्ती के साथ पढ़ाई के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। दो साल तक घरों में बंद रहकर विद्यार्थी अब स्कूलों में जाने में रूचि दिखा रहे हैं। स्कूल में नियमित कक्षाओं के लिए अध्यापक, अभिभावक व स्कूल प्रबंधन पूरी तरह से तैयार है।
कक्षा में पढ़ाना होता है प्रभावशाली: नरेश
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला लोअर बढेड़ा के प्रधानाचार्य नरेश जसवाल का कहना है कि कक्षाओं में पढ़ाया हुआ पाठ्यक्रम अधिक प्रभावशाली होता है। कोरोना महामारी में विद्यालय बंद रहने का विकल्प ऑनलाइन पढ़ाई ही था, जिसे अध्यापकों ने बखूबी निभाया। अब नियमित कक्षाएं शुरू हो रही हैं। ऐसे में इससे बेहतर कुछ नहीं है। कक्षा में बच्चों के साथ सीधा संवाद होता है और सब पर बराबर नजर रहती है।
स्कूल ही बेहतर विकल्प: वंदना
अभिभावक वंदना कुमारी का कहना है कि स्कूल में सही पढ़ाई हो सकती है। वर्तमान में बच्चों का कोविड टीकाकरण हो चुका है और अब नियमित स्कूल चल रहे हैं। यह राहत भरा है। बच्चों की पढ़ाई भी कवर हो रही है। स्कूल लगातार जारी रहने से चिंता कम हुई है। पहले कोविड मामले अधिक होने पर ऑनलाइन कक्षाओं को ही तवज्जो दी जा रही थी। लेकिन अब परिस्थितियां पहले जैसी नहीं है। स्कूल ही पढ़ाई के लिए बेहतर विकल्प है।
दोस्तों के साथ मस्ती भी और पढ़ाई भी: कृतिका
जमा दो की छात्रा कृतिका पठानिया का कहना है कि स्कूल में पढ़ाई करना अच्छा लगता है। यहां दोस्तों के साथ मस्ती भी होती है और पढ़ाई भी होती है। अध्यापकों के साथ पढ़ाई को लेकर चर्चा होती है। ऑनलाइन कक्षाओं में इस तरह से नहीं हो पाता था। पहले स्कूल जाने पर डर लगता था, अब टीकाकरण भी हो गया है। अब कोई डर नहीं है।
स्कूल में मिलता है अलग माहौल: साक्षी
बसाल स्कूल की नौवीं कक्षा की छात्रा साक्षी का कहना है कि स्कूल में अलग माहौल मिलता है। जिसमें पढ़ाई भी होती है और दोस्त के साथ समय भी व्यतीत होता है। घर का माहौल कुछ अलग रहता है। वहां पढ़ाई पर इतना फोकस नहीं हो पाता है। कक्षाएं सुचारू चलनी चाहिएं। टीकाकरण करवा लिया है। ऐसे में स्कूल आने पर अब कोई डर नहीं लगता है।
100 फीसदी बच्चों ने करवाया कोविड टीकाकरण
जिले में 15-18 के आयुवर्ग के 33470 बच्चों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य रखा गया था। स्वास्थ्य विभाग ने 100 प्रतिशत बच्चों को वैक्सीन लगा दी है। इसके अलावा 12 से 14 वर्ष के 26103 बच्चों को कोविड वैक्सीन लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें से करीब 9000 बच्चों वैक्सीन लगा दी गई है।