संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। सरकार और शिक्षा विभाग के सरकारी स्कूलों में बेहतरीन सुविधाएं देने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। आलम यह है कि शिक्षा हब सोलन में 250 से अधिक स्कूलों में अध्यापकों के पद रिक्त हैं। 104 स्कूल एक-एक अध्यापक के सहारे चल रहा है जिस कारण अध्यापकों को प्री-प्राइमरी से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो गया है।
इकलौते शिक्षक पर छह कक्षाएं पढ़ाना भारी पड़ रहा है। ऐसे में बच्चों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी शिक्षकों पर भारी पड़ रही है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। उप निदेशक प्रारंभिक शिक्षा दीवान चंदेल ने कहा कि जेबीटी की भर्ती नहीं होने से समस्या आ रही है। इसके लिए शिक्षा विभाग को लिखा गया है। धरातम पर स्थिति समझने के लिए अमर उजाला ने जिला मुख्यालय से सटे कुछ स्कूलों का जायजा लिया।
पेश है लाइव रिपोर्ट (1) :
डेपुटेशन पर चल रहा गुग्गाघाट स्कूल
दिन: शनिवार, समय: सुबह, 10:12 बजे। शहर से 15 किलोमीटर दूर राजकीय प्राथमिक पाठशाला गुग्गाघाट के प्रांगण में पहली से पांचवीं कक्षा तक के बच्चे बैठे हैं। प्रार्थना सभा का समय है। एकमात्र अध्यापक मौजूद है। इस दौरान स्कूल में रिक्त पद के बारे में बात की तो अध्यापक ने बताया कि यहां दो अध्यापकों पद स्वीकृत हैं। एक अध्यापक की बदली हो गई जबकि दूसरा अध्यापक आवश्यक छुट्टी पर हैं। वह आंजी स्कूल से डेपुटेशन पर आई हैं। 10:22 मिनट पर अध्यापक ने पहली से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को एक कमरे में एकत्रित कर पढ़ाना शुरू कर दिया।
लाइव रिपोर्ट (2) :
एक कक्षा को पढ़ाएं तो दूसरे बच्चे मचा रहे शोर
जिला मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूर प्राइमरी स्कूल गलानग
समय : सुबह, 11:26 बजे। स्कूल में एक अध्यापक को बच्चों ने घेरा हुआ है। अध्यापक पांचवीं कक्षा के बच्चों को पढ़ा रही हैं। कक्षा में प्रवेश किया तो सभी बच्चों ने खड़े होकर सुबह की नमस्ते की। स्कूल में प्री-प्राइमरी के लिए सिर्फ एक ही अध्यापक है। अध्यापक से जैसे ही बात शुरू की तो कुछ बच्चे कक्षा से बाहर चले गए। बाहर गए बच्चों को अध्यापक लाने गई तो पहली कक्षा के बच्चे इधर-उधर भागने लगे। अध्यापक ने बताया कि प्री-प्राइमरी से पांचवीं कक्षा तक बच्चों को पढ़ाने में काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। सभी कक्षाओं पर ध्यान रखने के लिए एक स्थान पर ही सभी को बैठाना पड़ रहा है। एक कक्षा को पढ़ाएं तो दूसरी कक्षा के बच्चे शोर करना शुरू कर देते हैं। कई बच्चों एक साथ संभालना मुश्किल है।
प्री-प्राइमरी से पांचवीं तक के बच्चों को संभालना चुनौती
लाइव रिपोर्ट (3) :
शहर से 16 किलोमीटर दूर राजकीय प्राथमिक पाठशाला खनोग। समय, दोपहर 12:20 बजे। एक अध्यापक ने सभी बच्चों को एक कमरे में बैठाया है। अध्यापक छोटे बच्चों के लिए ब्लैकबोर्ड पर अक्षरों का ज्ञान दे रही हैं तो कभी अन्य कक्षाओं के बच्चों के बुलाने पर उनके पास जा रही हैं। अध्यापक बता रहे हैं कि पिछले छह महीने से यहां पर एक अन्य अध्यापक का पद रिक्त चल रहा है जिस कारण परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि महीने का अंतिम दिन होने के चलते स्कूल की डाक तैयार करनी है। प्री-प्राइमरी से पांचवीं के बच्चों को भी देखना है। अकेले में यह कार्य करना बहुत मुश्किल है। इसे लेकर स्कूल में एसएमसी की बैठक है। 12:32 बजे एसएमसी अध्यक्ष और सदस्य पहुंचना शुरू होते हैं। 12:40 बजे स्कूल बैठक शुरू होती है जिसमें भी अध्यापक के रिक्त पद के संबंध में चर्चा की गई। इस दौरान एसएमसी पदाधिकारियों से भी बात की गई।
क्या कहते हैं एसएमसी पदाधिकारी
पढ़ाई पर असर
एसएमसी प्रधान ममता ठाकुर ने बताया कि स्कूल के लिए दो अध्यापकों के पद स्वीकृत हैं लेकिन पिछले करीब सात माह से यहां सिर्फ एक ही अध्यापक सेवाएं दे रही हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई पर प्रभाव पड़ रहा है।
कोविड में भी पढ़ाई पर प्रभाव
अभिभावक संजीव कुमार ने बताया कि कोविड के बीच काफी समय बाद स्कूल खुल पाए हैं। घर पर बच्चे अच्छे से पढ़ाई नहीं कर सके थे। स्कूल में एक ही अध्यापक होने से बच्चों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
अध्यापक तैनात करने की मांग
अभिभावक रूपा ने बताया कि एक अध्यापक पर पढ़ाई के साथ अन्य कई जिम्मेवारियां हैं। यदि अध्यापक को जरूरी कार्य से जाना पड़े या बीमार हो जाए तो स्कूल में ताला लगने की नौबत आ सकती है। उन्होंने अध्यापक तैनात करने की मांग की है।
स्कूल में प्री-प्राइमरी शुरू होने से बढ़ा कार्य
सविता ने बताया कि स्कूल में प्री-प्राइमरी भी शुरू कर दी हैं लेकिन कई अभिभावक स्कूल में अध्यापकों की संख्या पूरी न होने के चलते उन्हें स्कूल ही नहीं भेज रहे हैं। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।