संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले में बिना अध्यापक तैनात किए प्राथमिक स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू कर दी हैं। ऐसे में पहली से पांचवीं को पढ़ाने वाले जेबीटी शिक्षकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। छोटे बच्चों की शैक्षणिक, खेलकूद समेत अन्य गतिविधियों को करवाने में भी परेशानी आ रही है।
इससे छोटे बच्चों का भी नुकसान हो रहा है। प्रदेश में करीब चार हजार प्री-प्राइमरी स्कूलों में करीब दस हजार से अधिक बच्चों ने प्री नर्सरी कक्षाओं में प्रवेश लिया है।
जानकारी के अनुसार प्री-प्राइमरी कक्षाओं का मुख्य उद्देश्य बच्चों को बुनियादी स्तर मजबूत करना है। 2018 से प्रदेश सरकार ने प्री-प्राइमरी शुरू करने के लिए स्कूलों का चयन किया था। हाल ही में प्रदेश कई स्कूलों को प्री-प्राइमरी से जोड़ दिया है और आने वाले समय में प्री-प्राइमरी स्कूलों की संख्या बढ़ाने की भी योजना है।
प्री-प्राइमरी बच्चों के लिए मीड-डे मील भी शुरू कर दी है लेकिन अभी तक स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती को लेकर कोई भी निर्णय नहीं लिया है। इसके चलते छोटे बच्चे सिर्फ स्कूल में दोपहर का भोजन खाने के लिए पहुंच रहे हैं। जिले की 765 प्राथमिक स्कूलों में से 264 में नर्सरी और केजी की कक्षाएं चल रही है जिसमें 1164 बच्चों ने प्रवेश लिया है।
डाइट सोलन प्रधानाचार्य एवं जिला परियोजना अधिकारी समग्र शिक्षा चंद्र मोहन ने कहा कि जिले के प्राथमिक स्कूलों में जेबीटी शिक्षक प्री-प्राइमरी की भी शिक्षा दे रहे हैं। इसके लिए अध्यापकों की तैनाती का मामला सरकार के विचाराधीन है। तैनाती को लेकर सरकार आगामी निर्णय लेगी।