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अंत तक खली ने नहीं खोले पत्ते, सिर्फ भाइयों से सांझा की थी बात

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great khali join bjp
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नाहन (सिरमौर)। द ग्रेट खली उर्फ दलीप सिंह राणा के भाजपा में शामिल होते ही सियासत गरमा गई है। किसी को भी अंदाजा नहीं था कि महाबली खली भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। चंद सप्ताह पहले द ग्रेट खली ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से भी मुलाकात की थी। इस दौरान भी उनके राजनीति में शामिल होने के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन उन्होंने अचानक ही दिल्ली में भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर सबको चौंका दिया है। अंत तक खली ने राजनीति का हिस्सा न बनने का राज किसी को नहीं बताया। इतना जरूर था कि जब वह 10 दिन पहले अपने पैतृक गांव धिराइना पहुंचे थे तो भाइयों के साथ बात जरूर की थी।
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वीरवार को उनके भाजपा का दामन थामने की जानकारी पैतृक गांव में परिजनों को फोन के माध्यम से पत्नी हरपिंदर कौर ने दी। भाजपा में शामिल होते ही राजनीतिक पंडितों में भी खलबली मच गई है। सात भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर 27 सितंबर 1974 में जन्मे दलीप सिंह राणा का सफर आसान नहीं रहा है। गरीबी में पले-बढ़े खली को अपने समक्ष आई चुनौतियों को पार करने में काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। बचपन में कूली बनकर बोझा उठाया तो मेहनत मजदूरी कर परिवार का पेट पाला। छोटे भाई भगतराम ने बताया कि खली प्रधानमंत्री मोदी से काफी प्रभावित हुए हैं। उनसे प्रेरणा पाकर ही वह भाजपा में शामिल हुए। 10 दिन पहले खली घर आए थे तो राजनीति में जाने को लेकर भाइयों से चर्चा भी की थी। भाजपा में शामिल होने की जानकारी उनकी भाभी ने उन्हें फोन पर दी।
काफी संघर्ष कर पाया मुकाम
भीमकाय शरीर वाले दलीप सिंह राणा के परिवार की आर्थिक हालात सही नहीं थी। बचपन में पढ़ाई नहीं कर पाए। उन्हें भी दूसरे भाइयों की तरह मेहनत मजदूरी करनी पड़ी। पहले गांव में, फिर शिमला में मजदूरी की। भारी वजन उठाना खली के बाएं हाथ का खेल था। काफी संघर्षों के बाद एक अफसर ने खली को पंजाब आकर पुलिस में शामिल होने को कहा। अफसर ने खुद खर्च देकर उन्हें पंजाब बुलाया। खली भी अपने बड़े भाई के साथ पंजाब पुलिस में शामिल हो गया। रेस्लिंग उन दिनों पसंदीदा खेल बनता जा रहा था। खली को भी इसके लिए तैयार किया गया। आखिरकार खली अमेरिका पहुंच गए। जहां अंडरटेकर जैसे पहलवानों को धूल चटाकर वह स्टार बन गए। डब्ल्यूडब्ल्यूई छोड़ने के बाद उन्होंने पंजाब के जालंधर को ही अपनी कर्मभूमि बनाया। लंबे समय तक राजनीति से दूर रहे। अब भाजपा का दामन थामते ही एक बार फिर खली पर सभी की निगाहें टिक गई हैं।
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