नाहन (सिरमौर)। ऐतिहासिक शहर नाहन में ब्रिटिशकालीन पुस्तकालय हजारों विद्यार्थियों का भविष्य संवार रहा है। इस पुस्तकालय में रखीं 60 हजार पुस्तकों में ज्ञान का भंडार छिपा है। हजारों छात्र इस पुस्तकालय में पढ़कर कामयाब हुए हैं और आज भी इसी पुस्तकालय में सैकड़ों छात्र अपने भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।
ब्रिटिशकाल में राजा अमर प्रकाश ने अपनी बेटी राजकुमारी महिमा की याद में रियासतकालीन राजधानी नाहन शहर में पुस्तकालय की स्थापना की थी। इस पुस्तकालय में मौजूदा समय में छह भाषाओं में 60 हजार के करीब पुस्तकें उपलब्ध हैं, जो विद्यार्थियों का ज्ञान बढ़ा रही हैं।
पुस्तकालय में 1500 के करीब पाठक हैं। सात से आठ कमरों के इस पुस्तकालय में अब 220 छात्रों के बैठने की सुविधा उपलब्ध है।
पुस्तकालय में उर्दू, पंजाबी, अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत भाषाओं की किताबों के साथ-साथ पांडुलिपियों का भी खजाना है, जहां छात्र वर्ग के अलावा शहर के वरिष्ठ नागरिक भी अपना ज्ञान बढ़ाने पहुंचते हैं।
बता दें कि वर्ष 1927 में तत्कालीन सिरमौर रियासत के महाराजा अमर प्रकाश ने अपनी बेटी महिमा की पुस्तकों के प्रति रुचि को देखते हुए पुस्तकालय की स्थापना की थी। 1958 में महिमा पुस्तकालय को हिमाचल प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के अधीन लाया गया। पुस्तकालय में 75 पांडुलिपियों को भी संभालकर रखा गया है। डॉ. वाईएस परमार राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय नाहन के प्राचार्य डॉ. दिनेश कुमार भारद्वाज ने बताया कि पुस्तकालय में पुस्तकों की कोई कमी नहीं है। पाठकों के अनुसार पुस्तकालय में सभी तरह की नई और पुरानी से पुरानी पुस्तकें उपलब्ध हैं।
उन्होंने कहा कि यहां पर सीट क्षमता को बढ़ाया गया है। अब 220 के करीब पाठकों को यहां बैठने की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। सरकार के निर्देशानुसार यहां समय-समय सुविधाएं जुटाने के प्रयास किए जाते रहे हैं।