नित्थर कुल्लू)। आजादी के 74 साल बाद आखिरकार बोटा-पलकानी और कोयल बशला सड़क निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। ग्रामीण दशकों से यहां सड़क सुविधा की राह ताक रहे थे। जल्द ही क्षेत्र के लोगों का सड़क सुविधा का सपना पूरा होगा। सड़क निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिल गई है। एफसीए मंजूरी मिलने के बाद अब जल्द सड़क निर्माण का रास्ता साफ होगा।
गौर हो कि सड़क सुविधा से वंचित ग्रामीण दशकों से परेशानियों का सामना कर रहे हैं। कई ग्रामीण तो समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण जान तक गंवा चुके हैं। सड़कों के निर्माण से बशला, तिरमिधार, बोटा, पलकानी, सुणबोन और छछपड़ जैसे कई छोटे-बड़े गांव सड़क से जुड़ पाएंगे।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि घर बनाने से लेकर खाने पीने की सारी चीजों को आज भी वह पीठ पर ढोने को मजबूर हैं। नित्थर के बोटा पलकानी गांव के प्रदीप काजी, गुलजारी लाल, कांशीराम, रामलाल, मेहर कश्यप, अंकुश कश्यप और सतपाल सहित अन्यों ने बताया कि सड़क की औपचारिकताओं के लिए उन्होंने खुद सड़क के कागजात बनाकर कुल्लू भेजे।
उन्होंने विधायक किशोरी लाल सागर से मांग की कि सड़कों को बनाने का कार्य जल्द शुरू करें। प्रधान देहरा सरोज बाला ने बताया कि बोटा पलकानी सड़क के मुद्दे को जुलाई माह में नित्थर में जनमंच के दौरान शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर के समक्ष भी उठाया गया था। सड़क सुविधा नहीं होने से चार से ज्यादा गांवों के लोग मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी जदोजहद करने को मजबूर हैं। सड़क निर्माण की औपचारिकताएं पूरी होने पर स्थानीय ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। उम्मीद है कि विभाग जल्द सड़क निर्माण को शुरू करेगा।
अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग निरमंड राजेश शर्मा ने बताया कि कोयल से बशला सड़क मार्ग के लिए पहले ही बजट स्वीकृत हो चुका था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की वजह से इसका काम बीच में ही रोक दिया गया था। इसकी लंबाई चौदह किलोमीटर है। सड़क के लिए 12 करोड़ रुपये का बजट मंजूर हुआ है। बोटा-पलकानी सड़क मार्ग की लंबाई 5.5 किलोमीटर है। इसका काम भी अब सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद जल्द शुरू कर दिया जाएगा।
विधायक किशोरी लाल ने कहा कि कोयल-बशला मार्ग का कार्य चल पड़ा था, लेकिन फोरेस्ट क्लीयरेंस और सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी की वजह से सड़क का कार्य बीच में रुक गया था। अब सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिल गई है। जल्द इसका कार्य शुरू किया जाएगा। वहीं बोटा-पलकानी सड़क निर्माण से स्थानीय ग्रामीणों को भी लाभ मिलेगा।