संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। जबसे केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार आई है, तबसे लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या हो रही है। लोकतंत्र के अंतर्गत आने वाली सभी संस्थाओं को खत्म किया जा रहा है। यह बात किन्नौर विधायक जगत सिंह नेगी ने रिकांगपिओ में प्रेसवार्ता के दौरान कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जनजातीय क्षेत्रों के साथ भेदभाव कर रही है। किन्नौर जिले में प्रोजेक्ट एडवाइजरी कमेटी में विधायक को समिति का अध्यक्ष बनाया जाता था, अब उससे विधायक को वंचित किया जा रहा है।
जनजातीय सलाहकार परिषद जो कि सैद्धांतिक संस्था है, में सरकार के लाभप्रद पद पर बैठे व्यक्ति को गैर सरकारी सदस्य नहीं बनाया जा सकता है। वहीं प्रदेश वन विकास निगम के उपाध्यक्ष सूरत नेगी को गैर सरकारी सदस्य बनाया गया है, जो कि नियमों का उल्लंघन है। इसको लेकर हाईकोर्ट जाना पड़ा और कोर्ट ने सूरत नेगी के नामांकन पर सटे लगाया है।
किन्नौर जिले में जिला कल्याण समिति के तहत विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का मूल्यांकन किया जाता है, उसमें भी प्रदेश वन विकास निगम के उपाध्यक्ष सूरत नेगी को गैर सरकारी सदस्य बनाया गया है, जो कि सैद्धांतिक मूल्यों का हनन है। विधायक जगत सिंह ने प्रदेश वन विकास निगम के उपाध्यक्ष सूरत नेगी पर आरोप लगाते हुए कहा कि सूरत नेगी वन विकास निगम का कार्य न कर किन्नौर जिले में राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं।
वन निगम के कार्यों को दरकिनार किया जा रहा है। फॉरेस्ट कॉरपोरेशन बालन लकड़ी समय पर उपलब्ध नहीं करवा पा रहा है। बावजूद इसके कांग्रेस को सांगला, स्पिलो सहित अन्य स्थानों पर लकड़ी बैंक शुरू करना पड़ा है, जो कि फॉरेस्ट कॉरपोरेशन के लिए शर्म की बात है। इस मौके पर चंद्र मोहन नेगी, डॉ. सूर्य बोरस, प्रीतम नेगी, हितेश नेगी, सरोज नेगी और प्रेम नेगी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।