ज्यूरी (रामपुर बुशहर)। निगुलसरी हादसे में लापता लोगों की तलाश के लिए आईटीबीपी, एनडीआरएफ और सेना के जवान संकटमोचक साबित हो रहे हैं। जांबाज जवान बुधवार दोपहर से अपनी जान जोखिम में डालकर रेस्क्यू करने में जुट हुए हैं। निगुलसरी में बुधवार को घटी इस दुखद घटना की सूचना जैसे ही आईटीबीपी की 19वीं बटालियन सराहन को मिली, तो आईटीबीपी के 52 जवानों का रेस्क्यू दल फौरन घटनास्थल पर पहुंचा।
अभी तक आईटीबीपी के राहत दल ने अलग-अलग स्थानों में फंसे 7 घायलों और 14 शवों को कड़ी मशक्कत के बाद मलबे से बाहर निकाला। आईटीबीपी की 19वीं बटालियन के कमांडेंट टी. संजीत सिंह और असिस्टेंट कमांडेंट शशांक मिश्रा की अगुवाई में आईटीबीपी के रेस्क्यू दल ने खतरनाक गहरी खाई में पत्थरों के बीच फंसे शवों को सड़क तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
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बुधवार को शाम तीन बजे और वीरवार को भी अंधेरे में सुबह 3 बजे से ये जांबाज पहाड़ी में अटके पत्थरों से भरी खाई में लापता लोगों को ढूंढने में लगे हैं। वहीं कोटला में तैनात एनडीआरएफ की कंपनी ने भी रेस्क्यू में कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एनडीआरएफ की कंपनी कुछ समय पहले ही कोटला में तैनात हुई है। इस घटनास्थल से मात्र 20 किलोमीटर दूरी पर होने से राहत कार्य समय पर शुरू हो पाया और कई लोगों की जिंदगी बचाई जा सकी।
आईटीबीपी की 19वीं बटालियन सराहन के कमांडेंट टी. संजीत सिंह ने बताया उनकी बटालियन के 52 जवानों के रेस्क्यू दल ने आगे बढ़कर जोखिम उठाकर 7 घायल और 14 शवों को निकालने में अहम भूमिका निभाई है। 24 घंटे से चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन में पहाड़ी से रुक-रुक कर पत्थर गिरने के कारण बाधा आ रही है। इसके बावजूद बचाव दल अपनी जान की परवाह किए बगैर लापता लोगों की तलाश में डटे हुए हैं।