हिमाचल प्रदेश में सनावर स्थित एक प्रसिद्ध स्कूल को एक करोड़ रुपये अनुदान के रूप में देने के मामले में पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखवीर सिंह बादल कानूनी विवाद में घिर गए हैं।
उच्चतम न्यायालय में शुक्रवार को इस मामले में न्यायमूर्ति आरएम लोढा और न्यायमूर्ति शिवकीर्ति सिंह की खंडपीठ ने पंजाब प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सुखपाल सिंह खैहरा की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब सरकार और सुखबीर सिंह बादल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
इस मामले में संक्षिप्त सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि सुखबीर सिंह बादल ने हिमाचल प्रदेश के सनावर स्थित लॉरेंस स्कूल से पढ़ाई की है और उसी स्कूल को अनुदान के तौर पर एक करोड़ रुपये देना सरकारी राजस्व की बर्बादी है।
खैहरा के वकील की दलील थी कि उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने पंजाब निर्माण कोष से यह राशि दी है जबकि पंजाब के बाहर स्थित किसी स्थापित और समृद्ध निजी स्कूल को इस कोष से धन मुहैया कराना गैरकानूनी है।
वकील ने दलील दी कि सुखबीर बादल ने ऐसा करके सरकारी राजस्व की हानि की है। उन्होंने कहा कि पंजाब वित्तीय संकट से गुजर रहा है और मौजूदा सरकार जनता की गाढ़ी कमाई को पानी की तरह बहा रही है।
याचिकाकर्ता ने किसी राज्य सरकार द्वारा दूसरे राज्य के किसी समृद्ध निजी संस्थान को वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाने की संवैधानिकता को चुनौती दी है।
हालांकि पंजाब सरकार की ओर से दलील दी गई है कि सुखबीर बादल ने यह राशि राष्ट्रीय विरासत के एक संस्थान को दी है। इसके बाद न्यायालय ने पंजाब सरकार और सुखबीर बादल को नोटिस जारी करके जवाब देने को कहा।
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष अक्तूबर माह के दौरान लारेंस स्कूल के वार्षिक समारोह में हिस्सा लेने पहुंचे सुखबीर सिंह बादल ने एक करोड़ रुपये पंजाब निर्माण कोष से स्कूल को देने की घोषणा की थी।
सुखबीर बादल ने 1980 तक इस स्कूल में पढ़ाई की है।