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जिला के साढ़े 11 लाख लोगों के लिए मात्र 44 एंबुलेंस और 31 चालक

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मंडी। जिला मंडी में स्वास्थ्य सेवाएं कई स्थानों पर दम तोड़ रही हैं। हैरानी की बात है कि जिले की साढ़े 11 लाख की आबादी के लिए मात्र 44 आपातकालीन वाहन और मात्र 31 चालक हैं। इनमें 13 स्वराज माजदा और 31 वाहन 108 एंबुलेंस हैं।
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चालकों की कमी के कारण स्वास्थ्य संस्थानों में आपातकालीन समय में मरीज के लिए एंबुलेंस भेजना कठिन हो रहा है। वहीं, कई अस्पतालों में पांच-पांच एंबुलेंस के लिए मात्र एक ही चालक है, ऐसे में यह एंबुलेंस कंडम हो रही हैं। सीएचसी पधर और सिविल अस्पताल करसोग में दो-दो एंबुलेंस कंडम पड़ी हैं। उधर, आपातकालीन समय में चालक तुरंत नहीं मिलने के कारण मरीजों की जान पर बन आती है। जिले में ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जहां पर एंबुलेंस के देरी से पहुंचने के कारण लोगों की जान चली जाती है। मौजूूदा समय में जिले में एक जोनल अस्पताल और 14 सिविल अस्पताल हैं। वहीं, 12 सीएचसी, 85 पीएचसी और 335 एचएससी हैं। इनमें अधिकतर अस्पतालों में चालकों की बहुत अधिक कमी हो रही है। वहीं, मौजूदा चालकों के छुट्टी पर चले जाने पर तो मरीजों की जान राम भरोसे ही हो गई है। इस बारे में सीएमओ डॉ. देवेंद्र शर्मा ने कहा कि जिले में चालकों की कमी चल रही है। इसके लिए सरकार से मांग की गई है।
केस वन
स्वास्थ्य ब्लॉक बलद्वाड़ा में पांच एंबुलेंस हैं, मगर इन्हें चलाने के लिए मात्र एक ही चालक है। ऐसे में पूरे ब्लॉक में आपातकालीन समय में एंबुलेंस भेजना टेढ़ी खीर बन गया है। इस ब्लॉक की आबादी एक लाख से अधिक है, जबकि इसमें 368 गांव हैं। यहां पर 33 एचएससी, 12 पीएचसी, एक सीएचसी और एक सिविल अस्पताल है। इसके तहत आने वाले सिविल अस्पताल में भी मात्र एक ही चालक एंबुलेंस पर सेवाएं दे रहा है।
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केस टू
स्वास्थ्य ब्लॉक पधर में तीन एंबुलेंस में से दो एंबुलेंस पूरी तरह से खराब हैं। यहां पर विधायक की ओर से दी गई एंबुलेंस से काम चलाया जा रहा है। मात्र एक एंबुलेंस और एक चालक 95 हजार से अधिक आबादी को आपातकाल में सेवाएं दे रहे हैं। इस ब्लॉक में 641 गांव हैं, 31 एचएससी, 11 पीएचसी दो सीएचसी और एक सिविल अस्पताल हैं।
नेरचौक मेडिकल कॉलेज में मात्र दो एंबुलेंस
जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान में मात्र दो ही एंबुलेंस हैं। इनमें से एक एंबुलेंस सरकार की है, तो एक एंबुलेंस आईसीआईसीआई बैंक की ओर से प्रदान की गई है। केवल दो एंबुलेंस यहां के लिए नाकाफी हैं। इससे पहले यहां केवल एक ही एंबुलेंस थी। इस कारण मरीजों को आपातकाल में दिक्कतें होती थी, मगर अब यहां पर दो एंबुलेंस होने से कुछ हद तक स्थिति में सुधार हुआ है।
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