मंडी। आधुनिकता के दौर में आज रेडियो, टीवी, टेप रिकॉर्डर और फोन का स्थान छोटे से मोबाइल फोन ने ले लिया है। इसे आसानी से जेब में रखकर पलभर में दुनिया भर की जानकारी मिल रही है। वहीं अब गाड़ियों में रेडियो का चलन बढ़ा, अब रेडियो चालकों को यातायात जाम के बारे में आगाह करने के साथ ही उनका मनोरंजन भी का रहा है। हालांकि आजादी से पूर्व लोगों को घरों में रेडियो रखने के लिए लाइसेंस लेना पड़ता था। करीब 30 वर्ष पूर्व हर घर में लोग रेडियो सुनना पसंद करते थे, लेकिन वैज्ञानिकों के नए-नए आविष्कार से अब रेडियों व टेलीविजन की जगह छोटे से मोबाइल फोन ने ले ली है। पिछले करीब एक वर्ष से आकाशवाणी शिमला केंद्र से प्रसारित होने वाला विविध भारतीय का प्रसारण न होने से मंडी जिला भर के संगीत प्रेमियों, सहित हर उम्र के लोगों में भारी रोष है। विविध भारती प्रसार बहाल करने को लेकर लोगों ने कई बार आकाशवाणी शिमला प्रबंधन और दूरसंचार मंत्री को शिकायतें भेजी, लेकिन इस प्रसारण को बहाल नहीं किया गया है। शिमला केंद्र द्वारा मंडी जिला के लोगाें को विविध भारती प्रसारण के स्थान पर केवल शिमला आकाशवाणी के ही कार्यक्रम सुनने पड़ रहे हैं।
मंडी शहर के सेवानिवृत अध्यापक फरमान चंद, साहित्यकार डीएन कपूर, संगीतकार एसडी कश्यप, शुक्ला शर्मा, रंग कर्मी पारस वैद्य, चेतन कपूर, दीपक, जय कुमार, लोक गायक दुर्गा दास, गोविंद, रजनी आदि ने बताया कि विविध भारती प्रसाण से पहले उन्हें पुराने फिल्मी गीत, लोक गीत, सखी सहेली, एक ही फनकार, गीत सुहाने, इन से मिलिए सहित छाया गीत, समाचार, विभिन्न प्रदेशों की लोक संस्कृति पर आधारित कार्यक्रमों सहित किसानों, बागवानों, स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रम सहित शास्त्रीय संगीत, नाटक, प्रहस्न सहित समाचार आदि कार्यक्रम सुनने को मिलते थे। लंबे समय से प्रसारण बंद होने से इन कार्यक्रमों से वंचित रहना पड़ रहा है। हालांकि विविध भारत का प्रसारण शुरू करने को लेकर विभिन्न संस्थाओं द्वारा आकाशवाणी व दूर संचार मंत्री अनुराग ठाकुर से भी पत्राचार कर प्रसारण शुरू करवाने की गुहार लगाई थी, लेकिन इस ओर कोई सार्थक प्रयास नहीं हो पाए हैं। कहा कि वर्तमान दौर की धमाकेदार खबरों को छोड़कर रेडियो से सटीक खबरें सुनना उनकी दिनचर्या में शामिल है। ऐसे में प्रसारण को बहाल किया जाना चाहिए।