कुल्लू। जिले में नाशपाती के पौधों में फल की अच्छी सेटिंग नजर आ रही है। पेड़ों में नाशपाती मटर के दाने के बराबर हो गई है। निचले क्षेत्रों के बाद अब ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी नाशपाती की उम्दा फसल है। पिछले साल जिले में नाशपाती की 50 फीसदी से भी कम फसल थी।
इस बार नाशपाती की बंपर फसल से बागवानों को फायदा मिलेगा। खास बात यह है कि नाशपाती में सेब की तरह मेहनत कम लगती है। जिले की खराहल, पार्वती घाटी, ऊझी घाटी, बंजार और सैंज में नाशपाती का उत्पादन होता है। जिले में करीब 500 से अधिक हेक्टेयर क्षेत्र में नाशपाती का उत्पादन होता है। करीब 2,000 टन फसल होती है। पिछले साल नाशपाती के अधिकतर पेड़ खाली ही थे।
बागवान केशव राम, अमर चंद ठाकुर, देव राज, सुरेंद्र ठाकुर, राजेंद्र नैय्यर और मोनू ने कहा कि नाशपाती में बागवानों को अधिक मेहनत नहीं करनी पड़ती है। सेब में लगातार अंतराल के बाद स्प्रे करनी पड़ती है। मंडियों में नाशपाती की मांग भी खूब रहती है। इस बार फसल अच्छी होने से इसका लाभ बागवानों को मिलेगा।
नाशपाती में अच्छी सेटिंग नजर आ रही है। अप्रैल के आखिरी सप्ताह तक निचले क्षेत्रों में भी सेटिंग की तस्वीर साफ हो जाएगी।
-बीएम चौहान, उपनिदेशक, बागवानी विभाग