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समय से पहले पूरे हुए सेब के जरूरी चिलिंग ऑवर्स

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कुल्लू जिला सेब के बगीचों के लिए ताजा बर्फबारी संजीवनी का काम करेगी।-संवाद - फोटो : Kullu
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कुल्लू/खराहल। जिले में इस साल सर्दियों में समय-समय पर बर्फबारी से सेब के लिए जरूरी चिलिंग ऑवर्स पूरे हो गए हैं। ऐसे में सेब का उत्पादन और गुणवता तथा रंगत भी उम्दा होगी। बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि बर्फबारी से सेब उत्पादन बढ़ने की उम्मीद भी बढ़ गई।
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बर्फबारी से सेब की कई बीमारियों से भी निजात मिलेंगी। सेब के लिए 1200 से 1400 घंटे का सात डिग्री सेल्सियस तापमान का होना जरूरी है। ऐसे में सेब का उत्पादन बेहतर और गुणवत्त भी अच्छी होती है। सामान्य रॉयल के लिए 1200 से 1400 चिलिंग आवर्स होना आवश्यक है। कुछ स्पर वैरायटी के लिए 500 से 900 घंटे का चिलिंग आवर्स की आवश्यकता रहती है। चिलिंग आवर्स पूरे नहीं होते हैं तो इसका सीधा प्रभाव सेटिंग पर पड़ता है। उत्पादन भी घटता है।
फलोत्पादक मंडल कुल्लू के अध्यक्ष प्रेम शर्मा ने कहा कि इस साल बर्फबारी से समय पर चिलिंग आवर्स पूरे हो गए हैं। इससे सेब के अलावा नाशपाती, प्लम और जापानी और अन्य फलों को भी फायदा होगा। बागवानी विभाग कुल्लू के उपनिदेशक बीएम चौहान बताते हैं कि इस साल बर्फबारी से सेब के लिए आवश्यक चिलिंग आवर्स वक्त पर पूरे हो चुके हैं। जनवरी में हुई बर्फबारी से सेब की कई बीमारियों का खात्मा होगा। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता और पैदावार भी दोगुनी होने की उम्मीद है।
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समय पर पूरे हुए चिलिंग आवर्स
सेब के लिए जरूरी चिलिंग आवर्स भी बार-बार बर्फबारी से जनवरी में ही पूरे हो गए हैं। ऐसे में बेहतर उत्पादन और गुणवता भी उच्छी होगी। स्केल, बूली एफिड और कैंकर जैसी बीमारी से निजात मिलेगी। बर्फबारी से लंबे समय तक बगीचों में नमी रहेगी। इससे सेब की सेटिंग पर सकारात्मक असर रहेगा।
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