ज्वालामुखी/कांगड़ा/चामुंडा (कांगड़ा)। जिला कांगड़ा के प्रमुख शक्तिपीठों में सोमवार को पूजा-अर्चना व कन्या पूजन के साथ श्रावण अष्टमी मेले शुरू हो गए। हालांकि, नई व्यवस्था से श्रद्धालुओं में रोष दिखा। जिन श्रद्धालुओं के पास 72 घंटे की कोविड टेस्ट की निगेटिव रिपोर्ट या फिर दो डोज का वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट नहीं था, उन्हें मंदिर के भीतर प्रवेश नहीं दिया गया। बाहरी राज्य से आए श्रद्धालुओं को यही मलाल रहा कि गेट तक पहुंचने के बाद उन्हें दस कदम भीतर नहीं जाने दिया गया। प्रवेश नहीं मिला तो कई श्रद्धालु दुकानदारों को प्रसाद भी लौटा गए।
ज्वालामुखी में कन्या पूजन के साथ मेले शुरू
ज्वालामुखी। शक्तिपीठ ज्वालामुखी मंदिर में तहसीलदार दीनानाथ और मंदिर अधिकारी निर्मल सिंह ठाकुर ने पूजा-अर्चना और कन्या पूजन कर मेलों का आगाज किया। वरिष्ठ पुजारी एवं मंदिर न्यास ज्वालामुखी के सदस्य पुजारी मधुसूदन शर्मा ने पूजा-अर्चना और कन्या पूजन का आयोजन परंपरागत व विधिपूर्वक करवाया। मंदिर अधिकारी निर्मल सिंह ने बताया कि श्रावण अष्टमी के नवरात्र नौ अगस्त से शुरू होकर 16 अगस्त तक चलेंगे। मंदिर को बार-बार सैनिटाइज किया जा रहा है। श्रद्धालुओं को सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क पहनकर ही पर्ची सिस्टम से मंदिर में प्रवेश करने दिया जा रहा है। पुलिस विभाग की दो बटालियन गृह रक्षक व सुरक्षा कर्मचारी मंदिर में जगह-जगह तैनात कर दिए गए हैं। धारा 144 लागू हो गई है। मंदिर में शस्त्र, नारियल व ढोल-नगाड़े लेकर प्रवेश वर्जित कर दिया गया है। शहर में कहीं पर भी लंगर लगाने की अनुमति नहीं है। हवन-यज्ञ पर भी पूर्णतया प्रतिबंध रहा है। श्रद्धालुओं को अधिक देर तक मंदिर में नहीं रहने दिया जा रहा है।
बज्रेश्वरी मंदिर में मां के द्वार से बिना दर्शन कर लौटे सैकड़ों श्रद्धालु
बोले-नए नियमों के बारे में बार्डर ही बता देते अधिकारी
कांगड़ा। श्रावण अष्टमी के पहले नवरात्र को शक्तिपीठ बज्रेश्वरी देवी मंदिर में रौनक फीकी ही रही। सरकार की ओर से लागू किए गए नए दिशा-निर्देशों का पालन न होने से सैकड़ों श्रद्धालुओं को बिना दर्शन मायूस होकर लौटना पड़ा। जिन श्रद्धालुओं के पास निगेटिव रिपोर्ट या फिर कोविड की दो वैक्सीनेशन का सर्टिफिकेट नहीं था. उन्हें मंदिर के भीतर प्रवेश नहीं दिया गया। उत्तर प्रदेश से आए गिरजा पांडे ने बताया कि सरकार ने यदि यही व्यवस्था शुरू करनी थी, तो उन्हें बॉर्डर पर ही रोक लेते। सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर जब वे मंदिर पहुंचे तो उन्हें दर्शनों से वंचित कर दिया। वहीं, दूसरी ओर प्रदेश के लोगों को सिर्फ आधार कार्ड दिखाकर मंदिर जाने दिया जा रहा है। बाहरी राज्यों के लोग सरकार की इस असमंजस भरी व्यवस्था को लेकर कोसते रहे।
सुबह जैसे ही वाहनों और बाइकों पर यात्री कांगड़ा पहुंच टोलियों में काउंटरों पर जाकर दर्शन पर्ची लेने लगे, तो कइयों के पास न तो कोविड टेस्ट की निगेटिव रिपोर्ट थी और न ही दो डोज वैक्सीनेशन का सर्टिफिकेट। कई श्रद्धालु तो जानकारी के अभाव से सीधे मंदिर के मुख्य द्वार पहुंच गए। उन्हें भीतर जाने नहीं दिया गया। मायूस होकर लौट रहे श्रद्धालु रूपेंदर कौर, सोनू, प्रभात सिंह, किशोरी लाल, अछर सिंह ने बताया कि जब उन्हें वैक्सीन की दूसरी डोज लगी ही नहीं, तो वे सर्टिफिकेट कैसे लाते। जब उनसे कोविड टेस्ट की रिपोर्ट के बारे में पूछा गया तो कहा कि उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं थी। यह तो उन्हें बॉर्डर पर खड़े अधिकारियों को बताना चाहिए था। निराश होकर लौट रहे यात्री भगवंत कौर, निशा देवी, अंजू देवी ने बताया कि उन्हें इन नियमों की जानकारी नहीं थी। बस यही दुख है कि इतनी दूर से आकर कांगड़ा पहुंचकर वे दर्शन नहीं कर सके। मंदिर अधिकारी दिलजीत शर्मा ने बताया कि शाम तक करीब सात सौ श्रद्धालुओं ने देवी के दर्शन किए। इनमें से करीब पांच सौ श्रद्धालु बाहरी राज्यों से थे। उन्होंने माना कि नई गाइडलाइन का पालन न होने के तहत कई श्रद्धालु बिना दर्शन किए लौट गए।
चामुंडा देवी पहुंचकर भी बिना दर्शनों के लौटे 400 श्रद्धालु
चामुंडा। प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्री चामुंडा नंदिकेश्वर धाम में पहले दिन कम संख्या में ही श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर अधिकारी अपूर्व शर्मा ने बताया कि मंदिर पहुंचने वाले हर श्रद्धालु की कोविड टेस्ट की निगेटिव रिपोर्ट या कोविड वैक्सीन की दोनों खुराक लेने का प्रमाण-पत्र चेक करने के उपरांत ही मंदिर में प्रवेश दिया जा रहा है। लगभग 3000 श्रद्धालु मां चामुंडा के दरबार नतमस्तक हुए।
वहीं भटिंडा निवासी मोहिंदर सिंह ने बताया कि वह अपने सगे-संबंधियों के साथ चामुंडा मंदिर पहुंचे थे, परंतु कोविड टेस्ट की निगेटिव रिपोर्ट या प्रमाणपत्र न होने के कारण हमें मां के दर्शन नसीब नहीं हुए। उनका यह भी कहना है कि हमारे जैसे कई श्रद्धालु जैसे-तैसे किराया खर्चकर मां के दरबार पहुंचते हैं और मंदिर पहुंचने के बाद दर्शन करने से रोका जा रहा है। अगर ऐसा ही करना था, तो हमें बॉर्डर पर ही रोक देना चाहिए, ताकि हमारा समय व पैसा बर्वाद न होता। लगभग 400 श्रद्धालुओं को बिना दर्शन किए ही लौटना पड़ा। वहीं, प्रसाद विक्रेताओं का कहना है कि जिन श्रद्धालुओं को वापस भेजा जा रहा है, वह हमारे से खरीदा हुआ प्रसाद भी वापस कर रहे हैं।