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फार्मासिस्ट से दवाई लेकर लौट गए मरीज

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आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र राजा का तालाब में शुक्रवार सुबह 11:10 बजे तक खाली डाक्टर का कक्ष। - फोटो : Kangra
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राजा का तालाब (कांगड़ा)। आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र राजा का तालाब का एसडीएएमओ ऑफिस जब से यहां से शिफ्ट हुआ है, तब से स्वास्थ्य केंद्र में नियमित डॉक्टर के न बैठने से आयुर्वेद को महत्व देने वाले मरीजों को भारी दिक्कतों को सामना करना पड़ रहा है।
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अमर उजाला की संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने लोगों की मांग पर शुक्रवार को आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र राजा का तालाब में दस्तक दी। इस दौरान टीम ने 11:10 तक डॉक्टर की कुर्सी खाली पाई।
इसी बीच 12:40 पर सेवानिवृत्त हवलदार सौदागर सिंह जनेऊ व्याध की समस्या के कारण आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र में दवाई लेने आए, लेकिन डॉक्टर न होने से फार्मासिस्ट नरेश कुमार ने कुछ दवाई दे दी। इनका कहना है कि डॉक्टर न होने से उन्हें बेहद परेशानी हुई, जबकि वे आयुर्वेद को महत्व देते हैं। वहीं 12:45 पर मंगों राम (72) साल यूरिक एसिड की दवाई लेने आए, लेकिन मजबूरन इन्हें भी फार्मासिस्ट से दवाई लेनी पड़ी। इस समय प्रधान चकवाड़ी पृथी चंद भी मौजूद रहे। इनका कहना कि नियमित डॉक्टर न होने से परेशानी होती है। कहा कि लोग आयुर्वेद को महत्व देने लगे हैं। सुभाष सिंह उम्र 57 वर्ष 12:51 पर जोड़ों के दर्द की दवाई लेने आए, लेकिन मजबूरन फार्मासिस्ट से दवाई लेनी पड़ी। इनका कहना है कि वे मार्च महीने से दवाई ले रहे हैं। दोपहर 12:53 तक नौ लोग दवाई लेने आ चुके थे। वहीं, फार्मासिस्ट नरेश कुमार ने बताया कि डॉक्टर से दस्तावेज सत्यापित करवाने के लिए दो और लोग भी स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे थे। 78 साल के बुजुर्ग हवलदार गिरधारी लाल शर्मा का कहना है कि उन्होंने अपनी युवा अवस्था में देखा है कि यहां डॉक्टर नियमित बैठते रहे हैं। जबकि दूर दराज के लोग यहां दवाई लेने आते थे। वहीं आयुर्वेदिक स्वास्थ्य मंत्री डॉ. राजीव सहजल का कहना है कि इस विषय को प्रमुखता से देखेंगे, जबकि बहुत जल्द इस समस्या का स्थायर समाधान करने का प्रयास रहेगा।
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क्या कहती हैं डॉक्टर इंदू शर्मा
एसडीएएमओ ज्वाली डॉक्टर इंदू शर्मा का कहना है कि वे वीरवार को अन्य स्वास्थ्य केंद्र की जांच के लिए गईं थीं। काम के चलते शुक्रवार को भी राजा का तालाब में नहीं आ पाईं। महीने में उन्हें पांच से आठ इंस्पेक्शन करनी होती हैं। मैं मरीजों की नियमित जांच को प्रमुखता देती हूं, जबकि सेलरी बिल और अन्य दफ्तर संबंधी कार्यों को ज्वाली से करना पड़ता है।
क्या कहते हैं यहां सेवाएं दे चुके सेवानिवृत्त डॉक्टर
सेवानिवृत्त आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. भुवनेश शर्मा और डॉ. जतिंद्र गुप्ता का कहना है कि केंद्र बिंदु होने और लगभग छह दशक पुराने स्वास्थ्य केंद्र राजा का तालाब से एसडीएएमओ का दफ्तर शिफ्ट करना उचित नहीं था। क्योंकि उस समय डॉक्टर का नियमित पद यहां सृजित था, जबकि अन्य स्वास्थ्य केंद्रों के लिए भी यह उपयुक्त जगह थी। आज भी जो विभागीय पत्राचार होता है, उसमें ज्वाली एट राजा का तालाब लिखा होता है।
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