धर्मशाला में जायजा की दूसरे चरण की परियोजनाओं के शुभारंभ पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर प्रगतिशील क
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धर्मशाला। जाइका परियोजना के दूसरे चरण का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने निर्देश दिए कि कृषि वैैज्ञानिक और अधिकारी कार्यालय तक सीमित न रहकर खेतों में जाकर कृषकों को कृषि ज्ञान दें। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान कृषि ने सबसे अधिक योगदान दिया है। प्रदेश में अधिकतर लोगों के लिए कृषि ही आय का साधन बनी। केंद्र सरकार की ओर से 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के लिए अनेक योजनाओं का क्रियान्वयन किया गया है।
जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जेआईसीए) के आर्थिक सहयोग से 1010.60 करोड़ रुपये की हिमाचल प्रदेश फसल विविधिकरण संवर्धन परियोजना (एचपीसीडीपी) को लेकर जयराम ठाकुर ने बताया कि जाइका परियोजना के दूसरे चरण को राज्य के सभी 12 जिलों में लागू किया जाएगा और इससे राज्य के कृषक परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को अधिक बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि परियोजना का पहला चरण 2011 से प्रायोगिक आधार पर राज्य के पांच जिलों मंडी, कांगड़ा, हमीरपुर, बिलासपुर और ऊना में कार्यान्वित किया जा रहा है। इससे जिलों के किसानों की अर्थव्यवस्था बदल गई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश की 70 फीसदी से ज्यादा आबादी कृषि पर निर्भर है। इस परियोजना के माध्यम से हिमाचल में कृषि पर बल दिया जाएगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य फसल विविधिकरण के एक सफल मॉडल का प्रसार करना और 2031 तक परियोजना क्षेत्र में सब्जी उत्पादन क्षेत्र को 2500 हेक्टेयर से बढ़ाकर 7,000 हेक्टेयर करना है। राज्य सरकार प्रदेश के विकास के लिए केंद्र सरकार, बाहरी वित्त पोषण एजेंसियां जैसे जाइका, विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक आदि सभी संभावित स्रोतों से संसाधन जुटा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जाइका को वित्तीय सहायता का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत मानती है और राज्य के विकास में भागीदार है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना से प्रदेश से जहां कृषि को प्रोत्साहन मिलेगा, वहीं कृषि में आय की दृष्टि से नए आयाम स्थापित होंगे।