मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और रंजन शर्मा की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनाई के दौरान इस मुद्दे पर संज्ञान लिया। खंडपीठ ने कहा कि सड़क में दो-तीन लाइन होने के कारण भीड़ हो जाती है, जिससे हिमाचल प्रदेश में पंजीकृत वाहन, जिन्हें प्रवेश कर से छूट प्राप्त है उन्हें भी लाइन में लगना पड़ता है। इससे आम जनता को भारी असुविधा होती है। अदालत ने इस मामले में संबंधित अधिकारियों को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 29 अगस्त को होगी।
याचिका में बताया गया है कि न केवल राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित टोल बैरियरों पर , बल्कि हिमाचल प्रदेश और पंजाब की सीमा से लगे क्षेत्रों में एनएचएआई के अलावा अन्य प्राधिकरणों की ओर से निर्मित और रखरखाव की जाने वाली सड़कों पर भी अवैध और भेदभावपूर्ण टोल शुल्क लगाने से होने वाली अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
हिमाचल प्रदेश में पंजीकृत वाहनों के लिए अलग लाइन न होने के कारण, जिन्हें कर से छूट दी गई थी, यह व्यवस्था लागू नहीं हो पा रही है। केवल दो या तीन लाइन चालू होने के कारण, इस व्यवस्था के कारण लंबी कतारें लग रही थीं और वाहनों की आवाजाही धीमी हो रही थी, जिससे छूट का मूल उद्देश्य ही विफल हो रहा था।
अदालत ने कहा कि एनएचएआई की ओर से सनावर में एक और बैरियर-संग्रह केंद्र स्थापित किया गया है, जिसके राजमार्ग के दोनों ओर कई लेन हैं, जो लगभग 15 किलोमीटर दूर है। इसलिए, यह उचित होगा कि प्रतिवादी इस केंद्र पर एक साझा सुविधा स्थापित करने पर विचार करें और शुल्क साझा संग्रह केंद्र पर लिया जा सके या किसी वैकल्पिक स्थल की पहचान की जाए, जहां अधिक जगह हो।