डिडवीं टिक्कर(हमीरपुर)। ग्राम पंचायत डिडवीं मेें चल रही शिव महापुराण कथा में शुक्रवार को पंडित पीयूष महाराज ने गणेश भगवान के जन्म का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि माता पार्वती एक दिन स्नान करने लगी तो उन्होंने अपने शरीर के मैल से एक बालक का निर्माण किया और उसमें प्राण फूंक कर उसे जीवनदान दे दिया। उसे आज्ञा दी कि बेटा मैं स्नान करने जा रही हूं। किसी को भी अंदर मत आने देना। गणेश माता की आज्ञा पालन करते हुए खड़े हो गए। कुछ देर बाद शिव स्वयं वहां आए तो गणेश ने उनको अंदर जाने से रोक दिया। इस पर भगवान शिव को क्रोध आ गया। उन्होंने बालक पर त्रिशूल से प्रहार करके उसका शीश धड़ से अलग कर दिया। इसका पता चलने पर माता पार्वती ने जिद्द की कि बालक को दोबारा जिंदा किया जाए।
अंत में हार कर भगवान भोले नाथ ने एक हाथी के बच्चे का शीश काट कर गणेश के धड़ से जोड़ा और उसे जीवन दान दिया तथा देवों में अग्रणी स्थान देकर गणों का अधिपति बनाना पड़ा। गणों का ईश होने से उन्हें गणेश कहा गया। पूजा में सर्वप्रथम उन्हीं का स्मरण किया जाता है ताकि कार्य निर्विघ्न रूप से संंपन्न हों।