कोरोना की तीसरी लहर के बाद खुले शिक्षण संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। दो साल ऑनलाइन पढ़ाई के बाद ऑफलाइन पढ़ाई को भी रोचक बनाया जा रहा है, ताकि बच्चों पर दबाव न पड़े। छोटी कक्षाओं के बच्चों के लिए घर से लेकर स्कूल तक माहौल जिंदगी के नए दौर जैसा है। दो वर्ष घरों में रहने के बाद बच्चों में कई बदलाव आए हैं, जिन्हें सामान्य करने के शिक्षक हर संभव प्रयास कर रहे है। इसके लिए स्कूलों में शिक्षक बच्चों को घर जैसा माहौल मुहैया करवाने के लिए खेलें, सांस्कृतिक गतिविधियां और आपस में बातचीत का अधिक मौका दे रहे हैं।
राजकीय प्राथमिक पाठशाला रोपा स्वाहल की अध्यापिका मीना कुमारी का कहना है कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए पाठशाला में खेलों का आयोजन किया जा रहा है, ताकि बच्चों का चहुमुखी विकास हो सके। दो साल घरों में रहने के बाद बच्चों में कई बदलाव आए हैं, जिन्हें सामान्य करने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। प्री प्राइमरी, केजी व नर्सरी कक्षाओं के लिए विशेष रूप से शिक्षा के प्रावधान किए जा रहे हैं।
बाल स्कूल हमीरपुर के शिक्षक पंकज राणा का कहना है कि दो वर्ष घरों में रहने के बाद बच्चों में शिक्षा स्तर को सुधारने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। दो साल के भीतर बच्चों में जो खामियां आई हैं, उनकी भरपाई करने के लिए शिक्षक जुटे हुए हैं, ताकि बच्चे असहज महसूस न करें। बच्चों को बाकायदा कक्षा में पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियां करवाई जा रही हैं और उन्हें महामारी की जानकारी के अलावा मानसिक रूप से मजबूत किया जा रहा है।