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अमर उजाला शिक्षा अभियान : बच्चों को स्कूल में घर जैसा माहौल दे रहे शिक्षक

Tue, 29 Mar 2022 11:27 PM IST
शिमला ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, हमीरपुर (हि प्र)

सार

घरों में रहने के बाद बच्चों का मनोबल गिरा है। इसे दुरुस्त करने के लिए अध्यापक अनेक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को पढ़ा रहे है, ताकि बच्चों में आत्मविश्वास जगाया जा सके और दो साल में बच्चों में आए बदलावों की भरपाई की जा सके।
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प्राथमिक स्कूल हमीरपुर में परीक्षा देने पहुंचे बच्चों के हाथ सैनिटाइज करवाती अध्यापक। - फोटो : Hamirpur-HP
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विस्तार
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कोरोना की तीसरी लहर के बाद खुले शिक्षण संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। दो साल ऑनलाइन पढ़ाई के बाद ऑफलाइन पढ़ाई को भी रोचक बनाया जा रहा है, ताकि बच्चों पर दबाव न पड़े। छोटी कक्षाओं के बच्चों के लिए घर से लेकर स्कूल तक माहौल जिंदगी के नए दौर जैसा है। दो वर्ष घरों में रहने के बाद बच्चों में कई बदलाव आए हैं, जिन्हें सामान्य करने के शिक्षक हर संभव प्रयास कर रहे है। इसके लिए स्कूलों में शिक्षक बच्चों को घर जैसा माहौल मुहैया करवाने के लिए खेलें, सांस्कृतिक गतिविधियां और आपस में बातचीत का अधिक मौका दे रहे हैं।

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घरों में रहने के बाद बच्चों का मनोबल गिरा है। इसे दुरुस्त करने के लिए अध्यापक अनेक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को पढ़ा रहे है, ताकि बच्चों में आत्मविश्वास जगाया जा सके और दो साल में बच्चों में आए बदलावों की भरपाई की जा सके। सत्र शुरू होने से पहले ही स्कूलों में पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियां भी जोड़ ली गई हैं। उनके शारीरिक विकास के साथ मानसिक विकास भी करवाया जा रहा है। दो साल घरों में रहने के बाद बच्चों में जो कमियां आई हैं, उन्हें सुधारने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है।

बाल स्कूल हमीरपुर की प्रधानाचार्य नीना ठाकुर ने कहा कि बच्चों को कक्षा में पढ़ाने के साथ-साथ अन्य गतिविधियां कराई जा रही हैं। बच्चों में कोरोना के कारण जो परिवर्तन आया है, उसे सामान्य किया जा रहा है। बच्चों को स्कूल में घर जैसा माहौल मुहैया करवाने के लिए अध्यापक अभिभावकों की तरह बच्चों से बात कर रहे हैं और उन्हें कक्षा में पढ़ाने के साथ-साथ नैतिक मूल्यों का पाठ भी पढ़ा रहे हैं।

बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए करवाई जा रही खेलें

राजकीय प्राथमिक पाठशाला रोपा स्वाहल की अध्यापिका मीना कुमारी का कहना है कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए पाठशाला में खेलों का आयोजन किया जा रहा है, ताकि बच्चों का चहुमुखी विकास हो सके। दो साल घरों में रहने के बाद बच्चों में कई बदलाव आए हैं, जिन्हें सामान्य करने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। प्री प्राइमरी, केजी व नर्सरी कक्षाओं के लिए विशेष रूप से शिक्षा के प्रावधान किए जा रहे हैं।

शिक्षा स्तर को सुधारने के किए जा रहे प्रयास : पंकज

बाल स्कूल हमीरपुर के शिक्षक पंकज राणा का कहना है कि दो वर्ष घरों में रहने के बाद बच्चों में शिक्षा स्तर को सुधारने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। दो साल के भीतर बच्चों में जो खामियां आई हैं, उनकी भरपाई करने के लिए शिक्षक जुटे हुए हैं, ताकि बच्चे असहज महसूस न करें। बच्चों को बाकायदा कक्षा में पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियां करवाई जा रही हैं और उन्हें महामारी की जानकारी के अलावा मानसिक रूप से मजबूत किया जा रहा है।

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