रानी सुनयना के पदचिह्नों को पालकी में राजमहल को लेकर जाते कहार।
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चंबा। जिलावासियों की प्यास बुझाने के लिए अपने प्राणों को न्योछावर करने वाली रानी सुनयना की याद में मनाया जाने वाला ऐतिहासिक सूही मेला बुधवार को माता के पदचिह्नों की पिंक पैलेस में वापसी के साथ ही संपन्न हो गया। तीन दिवसीय सूही मेले के समापन अवसर पर हजारों लोगों ने माता सुनयना को याद कर नम आंखों से विदाई दी। गद्दी समुदाय की महिलाओं ने सुकरात गाकर रानी सुनयना को याद किया। मेले के अंतिम दिन अन्य दिनों की अपेक्षा श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रही।
गौरतलब है कि सूही माता मेले का आगाज 11 अप्रैल को हुआ था। राजमहल में राजकन्या शगुन वर्मन ने पूजा-अर्चना की। माता के पदचिह्नों को पालकी में रख कर राजमहल से ढोल-नगाड़ों की थाप पर सूही माता मंदिर ले जाकर स्थापित किया गया। इस शोभायात्रा के सैकड़ों लोग गवाह बने। मेले के अंतिम दिन सूही माता मंदिर में माता के पदचिह्नों की राजकन्या ने पूजा-अर्चना की। उसके बाद देर शाम ढोल-नगाड़ों और बैंड-बाजे की धुनों पर गद्दी समुदाय की महिलाओं की ओर से गाए गए सुकरात गीत के साथ माता की राजमहल (पिंक पैलेस) के लिए विदाई हुई।
चंबा रियासत के लोगों के लिए प्राण न्योछावर करने वाली रानी सुनयना की याद में वर्षों से मनाए जाने वाले तीन दिवसीय सूही मेले को जिलास्तरीय दर्जा प्रदान नहीं हो पाया है। प्रबुद्धजनों ने शासन-प्रशासन और संबंधित विभाग से मेले को जिलास्तरीय दर्जा दिलवाने की मांग की है।
मेले के समापन पर आसमान से बरसे बादल
सूखे जैसी स्थिति से जूझ रहे जिले में सूही मेले के समापन अवसर पर दोपहर बाद आसमान में जोरदार गर्जना के साथ ओलावृष्टि और बारिश का क्रम शुरू हो गया। मेला देखने पहुंचे लोग राजीव कुमार, कमलेश कुमार और आशीष कुमार ने बताया कि हर वर्ष माता के मेले के समापन अवसर पर बारिश होना स्वाभाविक है। कई लोगों ने बारिश की तुलना विरह वेदना से भी की।