चंबा। लिल्ह एरिया में 40 भेड़-बकरियों की मौत हो गई है। अज्ञात बीमारी से पीड़ित भेड़-बकरियों की मौत से भेड़पालकों को तीन लाख की चपत लगी है। एक-एक कर धारों पर मरने वाली भेड़-बकरियों की मौत ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। नतीजतन, भेड़पालकों ने प्रशासन और पशुपालन विभाग से उनके पशुधन को बचाने की गुहार लगाई है।
ग्राम पंचायत गाण के तहत आते लिल्ह क्षेत्र में भेड़पालक धोनिया निवासी रैणा की 20, काकू निवासी सकरैणा की 6, पृथो निवासी छतकड़ की 4, डुमणू निवासी सकरैणा की 5, मचलू निवासी सकरैणा की एक और धारो निवासी उनकेड़ की चार भेड़-बकरियां अज्ञात बीमारी से मर गई हैं। लिल्ह की अलग-अलग धारों (पहाड़ियों) पर भेड़-बकरियों की मौत हुई है। प्रभावित भेड़पालकों की मानें तो वे भेड़-बकरियों का पालन कर ही अपने परिवारों का पालन-पोषण करते हैं। गर्मियों में भेड़-बकरियों को लेकर धारों पर चले जाते हैं जबकि, सर्दियों के दिनों भारी बारिश और बर्फबारी से अपने पशुुधन को बचाने के लिए मैदानी इलाकों का रुख करते हैं। बावजूद इसके, बीच राह में होने वाली इस प्रकार की अप्रिय घटनाएं उनको नुकसान पहुंचाती हैं।
पशुपालन विभाग के चिकित्सक विवेक गुप्ता ने बताया कि उन्हें लिल्ह क्षेत्र में भेड़-बकरियों के अज्ञात बीमारी की चपेट में आकर मरने संबंधी जानकारी मिली है। कहा कि शुक्रवार सुबह ही क्षेत्र के लिए चिकित्सक की अगुवाई में छह सदस्यों की टीम को भेजा गया। पोस्टमार्टम के बाद पता चला कि भेड़-बकरियां आंतों और खुर की बीमारी से पीड़ित थीं। टीम मौके पर ही रहेगी और बीमार भेड़-बकरियों को इंजेक्शन लगाने के साथ ही भेड़पालकों को निशुल्क दवाइयां वितरित करेगी।