गोविंदसागर झील और नदी नालों के किनारे डंप किया गया फोरलेन का मलबा।
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बिलासपुर। अवैध डंपिंग का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। फोरलेन सड़क निर्माण में जुटी कंपनी टनल नंबर 4 के मलबे को अमरसिंहपुरा रोहिण नाले में आरओडब्ल्यू के बाहर बिना सुरक्षा दीवार लगाए डंप कर रही है। कई जगह सड़क के ही साथ ढेर लगा दिए गए हैं। हालात यह हैं कि कंपनी के पास अपनी कोई डंपिंग साइट नहीं है। वहीं, जिला प्रशासन और अन्य संबंधित विभाग भी इस मसले पर चुप्पी साधे हैं।
कंपनी की ओर से की जा रही अवैध डंपिंग से सारा मलबा गोविंदसागर झील में मिल रहा है। विस्थापित एवं प्रभावित फोरलेन समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि निर्माण कार्य कर रही कंपनी की ओर से इस मलबे के जगह-जगह ढेर लगाने से बारिश होने पर यह मिट्टी लोगों की जमीनों, मकानों, फसलों और रास्तों से होती हुई सीधे गोविंदसागर झील में समा रही है। क्योंकि, इस मिट्टी को रोकने का कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
वहीं, मुहाल मल्यावर भटोली के साथ सतलुज नदी के किनारे मिट्टी को डंप किया जा रहा है, जो डंपिंग साइट पहले से बंद हो चुकी है उसी डंपिंग साइट पर मिट्टी को बिना सुरक्षा दीवार के भरा जा रहा है। मदन लाल ने बताया कि जब कंपनी के पास डंपिंग साइट ही नहीं है तो मिट्टी उठाने का कोई औचित्य नहीं बनता है। फोरलेन की मिट्टी से क्षेत्र के नदी-नाले भरे जा रहे हैं,जो आने वाले समय में पर्यावरण के लिए घातक साबित होंगे। वहीं, गोविंदसागर झील में इतनी बड़ी मात्रा में मलबा पहुंचने से झील के जीवों और मछली उत्पादन पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है।
पर्यावरण और गाविंदसागर झील को हो रहे नुकसान के बाद भी संबंधित विभाग इस पर चुप्पी साधे बैठे हैं। समिति ने उपायुक्त से आग्रह किया है कि पर्यावरण और लोगों को हो रहे इस नुकसान पर समय रहते उचित कार्रवाई करना सुनिश्चित करें नहीं तो अब विस्थापित समिति बड़े स्तर पर आंदोलन करने से गुरेज नहीं करेगी। इसकी सारी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।