बिलासपुर। केंद्र और राज्य सरकार एचआईवी संक्रमण की रोकथाम के लिए जन जागरूकता और अन्य गतिविधियों पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। बावजूद इसके, बिलासपुर जिले में एचआईवी से संक्रमित होने वाले लोगों का सिलसिला अभी थम नहीं रहा है।
बिलासपुर में पिछले आठ माह में एचआईवी के 6 नए मामले सामने आए हैं। हैरानी का विषय यह है कि सभी संक्रमित ग्रामीण क्षेत्र से हैं और सभी पेशे से या तो दिहाड़ीदार है या ड्राइवर हैं। अगर बात करें प्रदेश भर के आंकड़ों की तो एचआईवी संक्रमित मामलों में बिलासपुर प्रदेश भर में पांचवें नंबर पर है। इसमें पहले नंबर पर 1249 केस के साथ कांगड़ा, दूसरे नंबर पर 958 केस के साथ हमीरपुर, तीसरे नंबर पर मंडी 588, चौथे पर ऊना 554 और पंाचवें पर बिलासपुर 413 केस हैं। वहीं सबसे कम एचआईवी संक्रमितों वाले जिलों में लाहौल स्पिति 5 केस और किन्नौर 20 शामिल हैं।
बताते चलें कि सरकार एचआईवी संक्रमितों को जिन्हें एंटी रिट्रो वायरल ट्रीटमेंट दिया जा रहा है उन्हें 1500 रुपया प्रति माह भत्ता देता है। वहीं उनके बच्चों को 0-3 साल तक 300 रूपये, 3-6 साल तक 400 रुपये, 6-12 साल तक 500, 12-16 साल तक 600, 16-18 साल तक 700 रुपये पेंशन प्रतिमाह देती है। वहीं अगर कोई बच्चा एचआईवी संक्रमित है तो उसे भी 1500 रुपया प्रति माह पेंशन दी जाती है।
जिले की बात करें तो यहां पर अभी तक 413 एचआईवी पॉजिटिव एंटी रिट्रो वायरल ट्रीटमेंट पर जिंदा हैं। यह सभी लोग ट्रीटमेंट के जरिए सामान्य जीवन यापन कर रहे हैं। इनमें 25 बच्चे, तो अन्य में 50-50 फीसदी महिला और पुरुष शामिल हैं। लेकिन, सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि सरकार द्वारा इतने जागरूकता कार्यक्रम चलाने के बाद भी लोग एचआईवी के प्रति जागरूक नहीं हो रहे हैं। जिसका परिणाम यह है कि पिछले 8 माह में 6 केस एचआईवी पॉजिटिव आए हैं। एचआईवी काउंसलर नीना शुक्ला ने बताया कि जो संक्रमित हर माह दवाई लेते हैं उनकी हाजिरी रजिस्टर पर लगती है। वहीं पेंशन का पैसा सालाना उनके खाते में आता है। उन्होंने कहा कि लोगों को समय-समय पर एचआईवी के प्रति जागरूक करने के लिए जागरूकता गतिविधियां जारी हैं।