सरकार की आमदनी और खर्चे में भारी अंतर है। जिस उद्देश्य के लिए विभिन्न एजेंसियों से ऋण लिए जाए रहे हैं, उनमें अधिकतर मद में पैसा खर्च ही नहीं हो रहा।
प्रधान महालेखाकार सतीश लूंबा ने शुक्रवार को प्रेसवार्ता के दौरान यह खुलासा किया। कैग ने सरकारी महकमों की आडिट रिपोर्ट 21 फरवरी को विधानसभा के बजट सत्र में आखिरी दिन रखी थी, लेकिन प्रेसवार्ता शुक्रवार को हुई। इस देरी के लिए प्रधान महालेखाकार ने गॉर्टन कैसल में लगी आग को जिम्मेदार ठहराया।
लूंबा ने बताया कि प्रदेश में सही वित्तीय योजनाओं की कमी के कारण करोड़ों का घाटा उठाना पड़ रहा है। इसके अलावा विभिन्न विभागों के कार्यों और उनके खर्चों का लेखाजोखा रखने के लिए भी कोई ऐसे संतोषजनक कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। सर्व शिक्षा अभियान, भारत निर्मल अभियान जैसी कई ऐसी केंद्रीय योजनाएं हैं, जिनका बजट राज्य सरकार के बजट में न आकर संबंधित जिलों में डीसी को जाता है।
ऐसी विभिन्न योजनाओं का बजट सीधे रिलीज होने के कारण करीब 1200 करोड़ रुपये की राशि का ऑडिट के दौरान कहीं हिसाब ही नहीं मिला। स्वास्थ्य क्षेत्र में मेडिकल एजूकेशन और रिसर्च वर्क में संतोषजनक कार्य न करने का कारण स्वास्थ्य विभाग के करीब 18 करोड़ लैप्स हो गए हैं।
परिवहन विभाग और आबकारी विभाग में तालमेल न होने कारण हजारों वाहनों के पंजीकरण के बारे में एक्साइज डिपार्टमेंट को जानकारी ही नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि इन खामियों को लेकर प्रदेश सरकार को अवगत करवाया जा चुका है और सुझाव भी दिए गए हैं। ऑडिट रिपोर्ट में सुझाव के बाद सरकार ने करीब 271.7 करोड़ रुपये का रेवेन्यू वसूल भी कर चुकी है।
व्हीकल टैक्स में 15 करोड़ की चपत लगी
कैग ने बताया है कि परिवहन विभाग के पास रजिस्टर करीब 47 हजार 512 वाहनों में से 13 हजार 314 कॉमर्शियल वाहनों का एक्साइज डिपार्टमेंट के पास रजिस्ट्रेशन ही नहीं था। ऐसे में इन वाहनों से गुड्स और पैसेंजर टैक्स ही नहीं वसूला गया, जिससे सरकार को 15 करोड़ से अधिक का घाटा उठाना पड़ा।
फर्जी यूसी दे रहे हैं विभाग और कंपनियां
पीडब्ल्यूडी में क्वालिटी एंड कंट्रोल विंग में प्रशिक्षित अधिकारी न होने के कारण भवनों और सड़कों का निर्माण सही नहीं हो रहा है। कंपनियों और विभागों की ओर से फर्जी यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट (यूसी) दिए जा रहे हैं। उन्होंने वन विभाग पर कैंपा फंड का खर्च पर्यावरण के बचाव में खर्च न करने पर भी सवाल उठाया।