बिना विद्यालय छोड़ने का प्रमाणपत्र के किसी भी स्कूल में प्रवेश मिलने के निर्णय पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। अब किसी दूसरे स्कूल में जाने के लिए विद्यार्थियों को स्कूल छोड़ने के प्रमाण पत्र की आवश्यकता होगी। सरकार के इस आदेश के खिलाफ निजी स्कूल प्रबंधक हाईकोर्ट चले गए थे। जिसके बाद इस पर रोक लगा दी गई। वहीं शिक्षा निदेशालय की ओर से भी सभी जिला शिक्षा अधिकारी को इस बारे पत्र जारी कर सूचित किया गया है। बता दें कि कोरोना संक्रमण की पहली लहर से ही स्कूल फीस को लेकर घमासान चल रहा है। संक्रमण के कारण लोगों को रोजगार व धंधे चौपट होने के कारण वे निजी स्कूलों की भारी भरकम फीस के कारण अभिभावक बच्चों का दाखिला दूसरे व सरकारी स्कूल में करवाना चाहते थे। जिसके लिए प्रमाणपत्र की आवश्यकता पड़ती है। निजी स्कूलों ने बिना बकाया चुकाए प्रमाण पत्र जारी करने से मना कर दिया। जिस पर सरकार ने आदेश जारी करते हुए बिना प्रमाण पत्र के किसी भी स्कूल में प्रवेश को मंजूरी दे दी थी। इस दौरान काफी बच्चे दूसरे स्कूल चले गए थे। इसे निजी स्कूल प्रबंधकों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। उच्च न्यायालय ने सरकार के इस आदेश पर रोक लगा दी। आदेशों पर रोक लगने से दाखिला के लिए प्रमाण पत्र आवश्यक हो गया। उप जिला शिक्षा अधिकारी शिवकुमार धीमान ने बताया कि निदेशालय ने इस बारे पत्र जारी किया है। बात दें कि इस दौरान करीब दस प्रतिशत विद्यार्थी दूसरे निजी या सरकारी स्कूल में प्रवेश ले चुके हैं।
कोरोना संक्रमण के कारण स्कूल पहले से ही बंद थे। ऐसे में संचालक व्यवस्था गड़बड़ाने की बात कहकर अभिभावकों से पूरी फीस ले रहे थे। परंतु सुप्रीम कोर्ट ने निजी स्कूल प्रबंधकों को केवल ट्यूशन फीस लेने के आदेश दिए। वहीं लॉकडाउन व संक्रमण के कारण लोगों को अपने रोजगार व नौकरी तक से हाथ धोना पड़ा। ऐसे में स्कूल फीस उन्हें भारी पड़ने लगी। लोगों ने बड़े पब्लिक स्कूल से बच्चों को निकाल कर कम खर्चीले स्कूल में दाखिला करना चाहा। जिस पर सरकार ने स्कूल छोड़ने के प्रमाण पत्र के बिना ही दाखिला देने के आदेश जारी कर दिए। ऐसे में विद्यार्थी स्कूल छोड़ने लगे। लॉकडाउन के कारण निजी स्कूलों के शुल्क लोगों के पास बकाया था। स्कूल छोड़ने के बाद शुल्क मिलने के कोई उम्मीद नहीं थी। ऐसे में निजी स्कूल प्रबंधकों ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दे दी।
सरकार ने विद्यालय छोड़ने के प्रमाण पत्र के बिना किसी भी स्कूल में विद्यार्थियों के प्रवेश दिए जाने के आदेश जारी किए थे। इससे निजी स्कूल प्रबंधकों को भी भारी नुकसान हो रहा था। आदेश को कोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है। अब एसएलसी के बिना दूसरे स्कूल में दाखिला नहीं मिलेगा। स्कूल का शिक्षा का शुल्क थलेने का अधिकार है। कोरोना संक्रमण के कारण आई आर्थिक परेशानियों को संचालक भी समझते हैं और इसके लिए अभिभावकों संग समांजस बनाकर काम भी किया जा रहा है।
मनोरंजन साहनी, यमुनानगर डिस्ट्रिक प्राइवेट स्कूल एसोसिशन।