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फर्जीवाडा में फंसे दोनों ठेकेदारों का पुलिस ने नगर निगम से मांगा रिकार्ड

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फर्जीवाड़ा में फंसे दोनों ठेकेदारों का पुलिस ने नगर निगम से मांगा रिकार्ड
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- वार्ड 12, 21 व 22 की नव नियमित कॉलोनियों के टेंडर में ठेकेदारों ने दिए थे फर्जी दस्तावेज
- पुलिस ने एक फरवरी को दोनों आरोपियों पर किया था केस दर्ज
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। नगर निगम के वार्ड नंबर 12, 21 और 22 में नव नियमित कालोनियों के टेंडरों में फर्जी दस्तावेज देकर फंसे ठेकेदार अनिल चुघ, पुनीत कांबोज के खिलाफ पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने नगर निगम से दोनों ठेकेदारों द्वारा टेंडर में लगाए गए दस्तावेज और अन्य रिकार्ड मांगा है। नगर निगम जल्द ही सभी दस्तावेज पुलिस को उपलब्ध करवाएगा। वहीं, फर्जीवाड़े के आरोपी ठेकेदार अनिल चुग ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका लगाई। लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया है। पुलिस का दावा है कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है।
नगर निगम वार्ड 12, 21, 22 की नव नियमित कॉलोनियों में सड़क, नालियां व अन्य विकास कार्य करने के लिए टेंडर निकाले गए थे। जिसके तहत वार्ड नंबर 12 में नव नियमित कॉलोनियों के विकास के लिए 222.55 लाख, वार्ड नंबर 21 के लिए 228.36 लाख रुपये और वार्ड नंबर 22 की नव नियमित कॉलोनियों के विकास के लिए 239.22 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए गए थे। कंपनी व ठेकेदार तीन दिसंबर से 13 दिसंबर 2021 तक ऑनलाइन टेंडर भर सकते थे। जिसमें ठेकेदार अनिल चुग व अन्य ठेकेदारों ने टेंडर भरे थे।
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इन टेंडरों के लिए ठेकेदारों से अनुभव प्रमाण पत्र मांगे गए थे। ठेकेदार अनिल चुग ने कार्यकारी अभियंता प्रांतीय मंडल लोक निर्माण विभाग बीएंड आर जालंधर कैंट से प्रमाणित अनुभव प्रमाणपत्र लगाया हुआ था। प्रमाणपत्र में ठेकेदार अनिल चुग द्वारा जालंधर कैंट में वर्ष 2020-21 में सड़कों के निर्माण कार्य किए जाने का प्रमाण दिया था। जबकि पुनीत कुमार द्वारा जो ईएसआई व ईपीएफ दस्तावेज दिया गया, वह इतने धुंधले थे कि पढ़े नहीं जा रहे थे। टेंडरों को लेकर ठेकेदारों ने एक दूसरे के खिलाफ नगर निगम में शिकायत दी थी। जिसमें उन्होंने कहा था कि नव नियमित कालोनियों के टेंडरों में कुछ फर्मों ने अन्य जिलों में व अन्य राज्यों का वर्क कम्पलीशन लगाया है। जिसके नकली होने का संदेह है। जिस विभाग द्वारा वर्क कम्पलीशन प्रमाण पत्र जारी किया गया है। उस विभाग से वर्क कम्पलीशन प्रमाण पत्र को प्रमाणित कराने के बाद ही टेंडर खोला जाए। इस पर निगम अधिकारियों ने कार्यकारी अभियंता प्रांतीय मंडल लोक निर्माण विभाग बीएंडआर जालंधर कैंट को पत्र भेजकर प्रमाण पत्र के बारे में जानकारी मांगी। जिसके जवाब ईमेल के माध्यम से मिला था। इसमें कहा गया था कि अनिल चुग का टेंडर के लिए कोई सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया। उसने फर्जी दस्तावेज तैयार किए हैं। वहीं पुनीत कुमार के दस्तोवज के ईएसआई व ईपीएफ के कोड नंबर की जांच के लिए ईएसआई कार्यालय अंबाला व ईपीएफ आफिस को लिखा गया। वहां से पुनीत के दस्तावेज नहीं मिले थे। इसके बाद ही कार्यकारी अभियंता रवि ओबराय ने इसकी शिकायत पुलिस को दी थी। एक फरवरी को शहर पुलिस ने मामले में दोनों ठेकेदारों पर अलग अलग केस दर्ज किया था। शहर थाना प्रभारी सुखबीर सिंह का कहना है कि धोखाधड़ी के मामले में दोनों ठेकेदारों के खिलाफ गहनता से जांच की जा रही है। दोनों ठेकेदारों द्वारा टेंडर में दिए गए दस्तावेज व अन्य रिकार्ड नगर निगम से मांगा गया है। इसके अलावा अन्य सभी दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं। जिनकी वे अपने स्तर पर जांच करेंगे।
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वर्जन
नगर निगम आयुक्त अजय सिंह तोमर का कहना है कि ठेकेदारों द्वारा टेंडर में दिए गए फर्जी दस्तावेज पुलिस ने मांगे है। यह दस्तावेज एकत्र कर पुलिस को महैया कराएं जाएंगे। मामले में पुलिस की हर संभव मदद की जाएगी।
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