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इकलौते बेटे से परिजनों का नहीं हो रहा संपर्क, तो किसी के लाडले को प्लेन का इंतजार

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जिले के जो विद्यार्थी यूक्रेन के विभिन्न शहरों में फंसे हुए हैं, उनके नहीं लौटने से परिजनों की चिंता बढ़ती जा रही है। कई विद्यार्थियों से तो उनके अभिभावकों का संपर्क भी नहीं हो रहा है। बच्चों के मोबाइल बंद आ रहे हैं। वहीं जो छात्र यूक्रेन का बॉर्डर पार कर चुके हैं, उन्हें भारतीय फ्लाइट में बैठने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। अभिभावकों ने भारत सरकार से मांग की है कि छात्रों को लाने के लिए जो प्लेन भेजे जा रहे हैं, उनकी संख्या बढ़ाई जाए ताकि सभी के बच्चे समय पर सुरक्षित वापस लौट सके। वहीं जो छात्र लौट आए हैं उनको फोन करके जिला प्रशासन की तरफ से भी फीडबैक लिया जा रहा है।
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दुर्गा गार्डन निवासी अश्वनी वासन और नीरू वासन का इकलौता बेटा 19 वर्षीय विंकल वासन एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए यूक्रेन के जफरोजिया में गया था। यह विंकल का पहला साल है। वह 11 दिसंबर को ही भारत से यूक्रेन गया था। यूक्रेन के हालात खराब होने के कारण यूनिवर्सिटी की तरफ से उन्हें हंगरी देश के बॉर्डर तक पहुंचाया जाना था। सोमवार सुबह अधिक भीड़ की वजह से वह पहली ट्रेन में चढ़ नहीं पाए थे। भारतीय समयनुसार मंगलवार शाम छह बजे विंकल को दूसरी ट्रेन में बैठना था। पिता अश्वनी वासन ने बताया कि ट्रेन के लिए विंकल स्टेशन पर पहुंच गया था। तब बेटे ने फोन करके कहा था कि वह ट्रेन में बैठने वाला है। इसके बाद बेटे का मोबाइल बंद होने के कारण उससे बात नहीं हो पाई है। उसके साथ करनाल और घरौंडा के भी दो छात्र हैं। विंकल ने उन्हें बताया कि जफरोजिया में अभी हमला नहीं हुआ था। सुरक्षा के लिए वह यूनिवर्सिटी द्वारा बनवाए गए बंकरों में छिपे रहते थे। वहां से हॉस्टल में खाना खाने के लिए जाते और वापस वहीं छिप जाते। अश्वनी वासन जगाधरी में टेंट हाउस का काम करते हैं। उन्होंने 27 फरवरी को विंकल की वापसी के लिए टिकट बुक कराई थी परंतु फ्लाइट रद्द हो गई।
सेक्टर-17 निवासी प्रणव भी अब तक यूक्रेन से भारत नहीं लौटा है। राहत की बात यह है कि प्रणव यूक्रेन से तो निकल चुका है लेकिन रोमानिया के हवाई अड्डे पर भारतीय प्लेन का इंतजार कर रहा है। उनकी माता सविता आर्य ने बताया कि प्रणव पांच साल पहले यूक्रेन की ओडेसा नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस करने के लिए गया था। चार दिन पहले प्रणव बस से रोमानिया बॉर्डर के लिए निकला था। बस पर भारत का झंडा लगा होने के कारण उन्हें रास्ते में कोई परेशानी नहीं आई। बेटे ने बताया था कि रोमानिया बॉर्डर पर यूक्रेन छोड़ने वालों की काफी भीड़ लगी हुई है। वहां बॉर्डर पार करने में लोगों को काफी दिक्कत आ रही है। वहां पर उन्हें सर्दी में बर्फबारी के बीच घंटों खड़े रहना पड़ा। सविता आर्य ने बताया कि बॉर्डर से एयरपोर्ट तक जाने में बस से नौ किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ रहा है। राहत की बात यह है कि बेटा सुरक्षित है। भले घर लौटने में कुछ समय लग जाए। प्रणव की दो बड़ी बहनें गरिमा व गीता हैं जो आस्ट्रेलिया में रहती हैं।
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अब तक 42 विद्यार्थियों और अन्य लोगों के नाम-पते प्रशासन को पता चले हैं जो पढ़ाई व अन्य कार्यों के लिए यूक्रेन में गए थे। डीसी पार्थ गुप्ता ने बताया कि सोमवार शाम तक 42 विद्यार्थियों की लिस्ट तैयार की जा चुकी है। खंड स्तर पर यूक्रेन में फंसे लोगों का डाटा जुटाया गया है। वहीं जिला प्रशासन की तरफ से एक हेल्पलाइन नंबर 01732-237801 भी जारी किया गया है। इस नंबर पर फोन करके जिले के लोग यूक्रेन में फंसे विद्यार्थियों व लोगों के बारे में जानकारी दे सकते हैं, ताकि उनके बारे में विदेश मंत्रालय को अवगत कराया जा सके।
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