यमुनानगर। नवरात्र के सातवें दिन शुक्रवार को मंदिरों में मां कालरात्रि का पूजन किया गया। सुबह व शाम के समय मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। इस दौरान घरों व मंदिरों में भक्तों ने मां कालरात्रि की विधिविधान से पूजा अर्चना की गई।
जिले के गौरी शंकर मंदिर, देवी भवन मंदिर, श्री सनातन धर्म मंदिर, राम जी की कुटिया, आदिबद्री स्थित माता मंत्रा देवी समेत अन्य मंदिरों में सुबह से लेकर शाम तक श्रद्धालु दर्शन व भजन कीर्तन के लिए पहुंचते रहे। मां कालरात्रि भक्तों की सभी मनोकामना पूर्ण करती हैं। शनिवार को नवरात्र की अष्टमी पर कन्याओं का पूजन होगा। साथ ही कन्याओं को भोजन खिलाया जाएगा।
पंडित जितेंद्र शास्त्री ने बताया कि नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की गई। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में सातवां रूप देवी कालरात्रि है। इसलिए नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है। स्याह रात्रि के समान माता का स्वरूप काला है। कालरात्रि माता के बाल खुले हुए हैं और गर्दभ की सवारी करती हैं। यह रूप काफी विकराल और भयानक है, लेकिन बहुत फलदायी है। मां काली को शुभकारी भी कहते हैं। दानव, दैत्य, राक्षस, भूत, प्रेत इनके स्मरण मात्र से ही भयभीत होकर भाग जाते हैं। यह ग्रह बाधाओं को भी दूर करने वाली देवी हैं।
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परिवार पर आई विपत्तियों को दूर करती है माता
नवरात्रि में भक्त माता रानी का उपवास रखकर पूजा अर्चना करते हैं। श्रद्धालुओं ने पूरी आस्था और विश्वास के साथ में मंदिरों में जाकर अपनी आस्था के अनुसार लोग माता को चढ़ावा चढ़ाया और हलवा पूरी सहित मेवा मिष्ठान का भोग लगाया। मां कालरात्रि के पूजा के बारे में यह मान्यता है कि मां दुर्गा का यह रूप नवरात्र की सप्तमी के दिवस में पूजा जाता है जो भक्त मां कालरात्रि की सच्चे हृदय से पूजा-अर्चना करता है तो मां कालरात्रि उस भक्तों की सभी मनोकामना पूर्ण करती हैं और उसके परिवार पर पड़ने वाली विपत्तियां माता रानी दूर करती हैं। इसी विश्वास के साथ भक्त माता रानी के मंदिर में विधिवत पूजा अर्चना कर अपनी मन्नतें मांगी।