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साढौरा में मार्केट कमेटी के गेट पर ताला लगाकर धरने पर बैठे किसान

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धान खरीद की तारीख आगे बढ़ाने के विरोध में शनिवार को भाकियू रतनमान ग्रुप के ब्लॉक अध्यक्ष सतपाल मानकपुर की अध्यक्षता में किसानों ने साढौरा की मार्केट कमेटी के गेट पर सुबह नौ बजे ही ताला लगा दिया और धरने पर बैठ गए। गेट पर किसानों का घेराव होने से दिनभर कोई कर्मी अंदर नहीं जा सका। मार्केट कमेटी कार्यालय के बाहर ताला लगने की खबर सुनकर नायब तहसीलदार भारत भूषण मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन किसानों ने नहीं सुनी। इसके बाद मंडी आढ़ती प्रधान प्रदीप वर्मा व नायब तहसीलदार ने फिर से किसानों को समझाया पर बात नहीं बनी। करीब आठ घंटे बाद शाम को चार बजे किसानों ने धरना समाप्त कर दिया।
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किसानों का कहना है कि वे अपने शेड्यूल के अनुसार ही ट्रालियों को लेकर मंडी में आए थे, लेकिन सरकार ने देर रात अचानक खरीद का समय बढ़ाया है, जो बिल्कुल गलत है। सरकार किसानों के साथ अन्याय कर रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। खरीद नहीं होने पर किसानों को अपनी फसल औने-पौने दामों में बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
भाकियू नेता सतपाल मानकपुर ने कहा कि हरियाणा व पंजाब में धान जल्दी पक जाती है। वैसे भी आजकल जल्दी पकने वाली किस्में आई हुई हैं। सरकार 15 जून से धान की रोपाई के लिए कहती है। कुछ किस्में 3 महीने में पककर तैयार हो जाती हैं, जो 15 सितंबर को कटाई योग्य हो जाती हैं। ऐसे में सरकारी खरीद में देरी का खामियाजा किसानों को उठाना पड़ेगा।
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सुभाष शर्मा ने कहा कि भाकियू ने 25 सितंबर से धान की खरीद शुरू करने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने एक अक्टूबर से धान खरीद की बात कही। जब एक अक्टूबर आई तो अब 11 अक्टूबर से खरीद की बात कही जा रही है। इससे पहले किसान मंडियों में धान लेकर पहुंचे हुए हैं, लेकिन खरीद नहीं होने से बारिश के कारण धान खेत व मंडियों में खराब हो रही है।
किसानों का कहना है कि सरकार ने खरीद के समय के साथ-साथ प्रति एकड़ वजन को भी घटा दिया है। पहले 33 क्विंटल धान प्रति एकड़ के हिसाब से खरीदी जाती थी, जिसको घटाकर प्रति एकड़ 25 क्विंटल कर दिया गया है। अब प्रति एकड़ 25 क्विंटल धान की ही खरीद की जाएगी। उन्होंने बताया कि कई किस्मों में 30 क्विंटल से ज्यादा धान की पैदावार होती है। ऐसे में किसान अपनी बची हुई धान कहां बेचेंगे।
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