उपायुक्त पार्थ गुप्ता ने किसानों को फसल अवशेषों में आग जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में किसानों को जागरूक करने के लिये लघु सचिवालय से एक जागरूकता वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि किसान फसल अवशेषों को न जलाए। इन अवशेषों को कृषि यंत्रों की सहायता से मिट्टी में मिलाकर जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ाए अथवा इन फसल अवशेषों की गांठें बनाकर इसको कमाई का साधन बनाए।
उप कृषि निदेशक जसविंदर सिंह ने बताया कि जिले के किसानों को वैन के माध्यम से गांव -गांव जाकर किसानों को जागरूक किया जाएगा। किसानों को बताया जाएगा कि फसल अवशेषों में आग लगाने से न केवल जमीन की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है अपितु वातावरण में जहरीली गैसों के घुलने से सांस व आंखों की बीमारियां बढ़ जाती हैं। किसानों को फसल अवशेषों में आग लगाने की आवश्यकता न पड़े इसके लिए विभाग द्वारा फसल अवशेष प्रबन्धन कृषि यन्त्रों पर अनुदान उपलब्ध करवाया जा रहा है। सहायक कृषि अभियंता विनीत कुमार जैन ने बताया कि जिन किसानों ने फसल अवशेष प्रबंधन कृषि यंत्रों पर अनुदान के लिए आवेदन किया था उन सभी के आवेदन स्वीकार कर लिए गए थे। किसानों को इन कृषि यंत्रों की खरीद करके बिल पोर्टल पर अपलोड करने की अंतिम तिथि 9 अक्टूबर 2021 निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि इन सभी कृषि यंत्रों का भौतिक सत्यापन उपायुक्त द्वारा गठित कमेटी के द्वारा 11 अक्टूबर व 12 अक्टूबर को किया जाएगा। इसके लिए किसान को भौतिक सत्यापन के समय अपने कृषि यन्त्र के साथ उसका खरीद बिल, ई-वे बिल, स्वयं घोषणा-पत्र व कृषि यंत्र के साथ लोकेशन सहित फोटो व अन्य दस्तावेज भौतिक सत्यापन कमैटी को देने होंगे। डीलर द्वारा जारी बिल निर्माता कंपनी द्वारा सत्यापित होना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि मौके पर कृषि यंत्र न पाए जाने पर किसान का आवेदन निरस्त किया जा सकता है। इस मौके पर सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी रतन सिंह, उप मण्डल कृषि अधिकारी, सतबीर लोहिया, उषा व तकनीकी सहायक अरविंद व नरेंद्र कुमार भी मौजूद रहे।