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छठ पूजा ः संतान और सुहाग के लिए मांगी सुख-समृद्धि

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छठ पूजन के दौरान शहर के बाड़ी माजरा पुल के पास जगमग पश्चिमी यमुना घाट। संवाद - फोटो : Yamuna Nagar
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। संतान और पति की लंबी आयु एवं सुख समृद्धि प्राप्ति का पर्व छठ जिले में धूमधाम से मनाया गया। जिलेभर में छठ की धूम व रौनक रही। पश्चिमी यमुना घाट पर बुधवार शाम को श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। महिलाएं परिवार सहित अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पश्चिमी यमुना घाट, पुराना हमीदा सहित अन्य घाटों पर पहुंची। परिवार के साथ भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर संतान, पति व परिवार के लिए मंगल कामना की।
बूड़िया, फतेहपुर पुल घाट, बाडी माजरा घाट, आजाद नगर, दड़वा, हमीदा के घाटों पर भीड़ रही। हालात ऐसे थे कि यहां पांव रखने की भी जगह नहीं थी। यमुना किनारों पर बैठकर महिलाओं ने पूजा की। धूप, दीप इत्यादि प्रज्ज्वलित कर यमुना जल में प्रवाहित किए गए। यमुना के जल में एक साथ सैकड़ों दीप प्रवाहित करने से दूश्य मनोरम दिखाई दिया। इन दूश्य को हजारों लोगों ने अपने मोबाइल में कैद कर लिया। वहीं पूरा दिन पूर्वांचल और बिहार के लोगों के घरों में उल्लास का माहौल दिखाई दिया। घर में एकत्र होकर महिलाओं व लड़कियों ने उत्साह से छठ गीत गाये। कांच ही बांस की बहंगिया, बहंगी लचकत जाए जैसे प्रचलित गीत खूब गाये गए। यमुना किनारे बैठकर छठी मईया को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न प्रसाद व भोग अर्पित किए गए।
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छठ पूजा का सबसे बड़ा मेला शहर के बाड़ी माजरा पुल पर लगा। जहां पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। घाट पर बनाई गई छठी मईया की वेदियों पर परिवार के साथ महिलाओं ने पूजा की। इस दौरान पुल के दोनों तरफ के घाटों पर खूब रौनक व भीड़ रही। दोनों तरफ घाटों पर महिलाओं ने पूजा की। वहीं सूर्य देव को अर्घ्य देकर छठी मईया से संतान प्राप्ति व सुख समृद्धि की कामना की। वहीं घाट पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी करवाए गए। जिसमें लोगों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया।
पति व संतान की दीर्घायु के लिए की कामना
बाड़ी माजरा घाट पर पूजा करने पहुंची मनीषा, सीमा, पूनम, सरिता, वंदना, शिवानी, मोहिनी, रूपा ने बताया कि छठ मइया के व्रत से साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह व्रत पति और बच्चों की लंबी आयु, उज्ज्वल भविष्य के लिए किया जाता है। उन्होंने बताया कि छठी मईया, सूर्य देव की बहन हैं। उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए भगवान सूर्य की आराधना की जाती है। व्रत करने वाले मां गंगा, यमुना या किसी नदी या जलाशय के किनारे यह व्रत करते हैं। पानी में खड़े होकर अस्त व उदय होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। काफी लोग घर के छत पर भी यह पर्व करते हैं। इस व्रत से रोग मुक्ति का आशीर्वाद भी मिलता है। यह बेहद कठिन और लंबा व्रत है। इस दौरान महिलाएं 36 घंटे निराहार व निर्जल रहकर व्रत करती हैं। यह व्रत वीरवार को पूर्ण होगा।
मां सीता व भगवान श्रीराम ने भी किया था व्रत
छठ पर्व दीपावली के बाद कार्तिक मास की षष्ठी तिथि को यह व्रत किया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार लंका विजय से लौटने पर दीपावली मनाई गई। अयोध्या आगमन पर भगवान श्रीराम का राजभिषेक होना था। राजकाज संभालने से पूर्व भगवान श्रीराम ने मां सीता के संग अपने कुल देवता सूर्य की पूजा सरयू नदी में की थी। उन्होंने षष्ठी तिथि का व्रत रखा। सरयू नदी में डूबते सूर्य को फल, मिष्ठान एवं अन्य खाद्य पदार्थों से अर्घ्य अर्पित किया था। सप्तमी को भगवान राम ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर सूर्य देव का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद राजकाज संभाल था। इसके बाद से आम जन भी सूर्य षष्ठी का पर्व मनाने लगे।
महाभारत में भी हुई थी छठ पूजा
श्रद्धालुओं के अनुसार छठ पूजा महाभारत काल के समय से होती आ रही है। जब पांडव सारा राजपाट जुए में हार गए, तब द्रौपदी ने छठ का व्रत किया। उन्होंने सूर्य देव और छठी मईया से पांडवों के राजपाट और सुख-समृद्धि की कामना की। जब पांडवों को उनका राजपाट वापस मिला, तब द्रौपदी ने धूमधाम से छठ पूजा की थी।
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आज उगते सूर्य को देंगे अर्घ्य
वीरवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसमें व्रती महिलाएं व उनके परिजन अपने घरों से बांस की टोकरी में मौसमी फलों के साथ पूजन सामग्री लेकर जाएंगे। इस दौरान शहर के तमाम बाजारों में खूब रौनक रही। लोगों ने जमकर खरीदारी की। शाम को अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया गया। जबकि तड़के उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण किया जाएगा। इस दौरान महिलाएं निर्जला व्रत करतीं हैं।

छठ पूजन के दौरान अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देती श्रद्धालु महिला। संवाद- फोटो : Yamuna Nagar

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