माई सिटी रिपोर्टर
यमुनानगर। पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ कृषि विभाग कानूनी कार्रवाई करेगा। इसके लिए जिले को रेड, येलो और ग्रीन जोन में बांटा गया है। रेड जोन में उन गांवों को शामिल किया गया है, जहां पिछले साल पांच या उससे ज्यादा पराली जलाने की घटनाएं हुई। वहीं तीन से ज्यादा घटना वाले गांवों को येलो जोन में रखा गया है। विभाग की तरफ से इन पर विशेष नजर रखी जाएगी और यहां दिन रात अधिकारियों की टीम गश्त करेगी।
साढौरा ब्लॉक का गांव सरावां जिले का एकमात्र रेड जोन में शामिल है। वहीं 50 गांवों को येलो जोन में शामिल किया गया है। बाकी बचे गांवों को ग्रीन जोन में रखा गया है। रेड और येल जोन में शामिल 51 गांवों में कृषि विशेषज्ञों की सेमीनार आयोजित कर ग्रामीणों को जागरूक भी किया जाएगा। साथ ही फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर सहायता की जाएगी।
इसी कड़ी सरस्वती नगर खंड के गांव अंबली में जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता सहायक कृषि अभियंता विनित कुमार जैन ने फसल अवशेष प्रबंधन कृषि यंत्रों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फसल अवशेषों में आग लगाने से न केवल जमीन की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है, अपितु वातावरण में जहरीली गैसों के घुलने से सांस व आंखों की बीमारियां बढ़ जाती है। इन फसल अवशेषों को कृषि यंत्रों की मदद से मिट्टी में मिलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ने के साथ-साथ पानी की बचत व खादों पर होने वाले खर्च में कमी आती है। इसके अतिरिक्त धान की फसल के बाद अपनी जमीन में सब्जियां उगाने वाले किसान स्ट्रा बेलर की मदद से फसल अवशेषों की बेल बनाकर मुनाफा भी कमा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि रेड एवं येलो जोन में शामिल गांवों में फसल अवशेष प्रबंधन कृषि यंत्र अनुदान पर उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया गया है। इन 51 गांवों के इच्छुक किसान व्यक्तिगत फसल अवशेष कृषि यंत्र व कस्टम हायरिंग केन्द्र की स्थापना पर अनुदान के लिए 25 सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। स्ट्रा बेलर द्वारा अपने फसल अवशेषों की गांठ बनवाने पर किसानों को एक हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रिोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके लिए उनको पराली प्रबंधन पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। शिविर में खंड कृषि अधिकारी नरेश कुमार, नरेन्द्र कुमार व चरण सिंह भी उपस्थित रहे।
ये गांव यलो जोन में
अरनौली, बिलासपुर, चाहड़वाला, धर्मकोट, जुड्डा शेखां, मछरोली, मंधार दो, मारवा खुर्द, मुसिंबल हिंदवान, पेरूवाला, रामखेड़ी, बलाचोर, देवधर, गनोला, कटारवाली, खारवन, खिजराबाद, किशनपुरा, लेदी, मलाकपुर खादर, मलकपुर खादर, मेहरमाजरा, मलिकपुर बांगर, रामपुर जाटान, टापू जयधर, तिमहों, खजूरी, मेहलावाली, नाहरपुर, अलीपुरा, बापा, बरसान, गहलोर, कंडरोली, खेड़की ब्राह्मण, खुर्दबन, रतनगढ़, फिरोजपुर रैयां, सादिकपुर, शामपुर, अंबली, बाल छप्पर, छप्पर मंसुरपुर, जगधोली, खानपुर, खेड़ी दर्शन सिंह, लवाना, शाहपुरा व ऊंचा चांदना।
वर्जन
राज्य में धान की फसल की कटाई का समय आने के साथ ही प्रदेश सरकार की फसल अवशेषों में आग लगने की घटनाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है। सभी गांवों में विशेषकर रेड व येलो जोन के गांवों में किसानों को फसल अवशेषों में आग न लगाने को लेकर जागरूक किया जा रहा है। इस बार भी पराली जलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। डॉ. जसविंद्र सिंह, कृषि उपनिदेशक।