हरियाणा प्रशासनिक अभिकरण की मुख्य बेंच पंचकूला में स्थापित होगी। यहां इसकी दो कोर्ट होंगी। मुख्य सचिव विजयवर्धन की ओर से 16 नवंबर 2021 को इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई। इसका गठन तो जुलाई 2019 में हो गया था, लेकिन अधिसूचना अब जाकर जारी हुई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अधिवक्ता हेमंत कुमार ने बताया कि अभिकरण के दायरे में राज्य सरकार के कर्मचारी और अधिकारी ही आएंगे। उनकी भर्ती प्रक्रिया, नियुक्ति एवं सेवा से संबंधित सभी प्रकार के कानूनी मामलों की सुनवाई अब हाईकोर्ट के बजाय अभिकरण में ही होगी।
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सरकार बोर्ड, निगमों, विभिन्न प्राधिकरणों, निकायों व सोसायटी के कर्मचारियों को भी इसके दायरे में ला सकती है। जिला अदालतों एवं राज्य विधानसभा के अधिकारी एवं कर्मचारी इसके दायरे में नहीं लाये जा सकते। अधिनियम में उल्लेख है कि यह उन पर लागू नहीं होगा। बीते 2 वर्षों में हिमाचल प्रदेश, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में राज्य प्रशासनिक अभिकरण को समाप्त किया जा चुका है।
अगस्त 2015 में केंद्र सरकार ने प्रशासनिक अभिकरण कानून, 1985 कानून की धारा 1 (4 ) में अधिसूचना जारी कर राज्य प्रशासनिक अभिकरण के प्रावधानों को हरियाणा में लागू कर दिया था। इसके चार वर्ष बाद 24 जुलाई 2019 को केंद्र ने सरकार के आग्रह पर इसकी स्थापना संबंधी गजट अधिसूचना जारी की। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की सेवानिवृत्त जज स्नेह पराशर को इसका चेयरपर्सन नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति पांच वर्ष अथवा आयु 68 वर्ष की होने तक की गई है। उन्होंने 25 जुलाई 2019 को कार्यभार संभाल लिया था।
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पंजाब एवं हरियाणा हाइकोर्ट बार एसोसिएशन इसका विरोध करती आ रही है। हाईकोर्ट ने इसकी अधिसूचना पर स्टे लगा दिया था। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की तरफ से कमेटी भी बनाई गई थी, लेकिन उसमें अभिकरण शुरू करने व बेंच स्थापना को लेकर आज तक आम सहमति नहीं बन पाई।