करनाल में रिबन काटकर टोल शुरू करते किसान यूनियन के पदाधिकारी व टोल प्रशासन।
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किसान आंदोलन में किसानों की मांगों पर सरकार के साथ समझौता होने के बाद आंदोलन को स्थगित कर दिया गया है। इसके बाद अब जहां रास्ते खुलने शुरू हो गए हैं, वहीं किसानों ने जो टोल बंद करा रखे थे वो भी खुलने शुरू हो गए हैं। सोमवार को करनाल के बसताड़ा टोल टैक्स को भारतीय किसान यूनियन चढूनी के पदाधिकारियों, किसानों और टोल प्रशासन ने किसानों की सहमति से दोबारा एक साल बाद टोल शुरू कर दिया है।
वहीं पानीपत टोल पर भी टोल वसूली शुरू हो गई है। भारतीय किसान यूनियन चढूनी के करनाल आईटी सेल प्रधान बहादुर मैहला ने करनाल टोल खुलने की जानकारी दी। पानीपत टोल शुरू होने के बाद पानीपत टोल पर वाहनों की कतार लगनी शुरू हो गई है। इससे वाहन चालकों को परेशानी का भी सामना करना पड़ रहा है।
एनएचएआई को हुआ नुकसान
कृषि कानूनों के विरोध में 11 दिसंबर 2020 को पंजाब के किसानों ने दिल्ली कूच किया था। उसी रात करीब साढ़े 11 बजे किसान बसताड़ा और पानीपत टोल प्लाजा से निकले थे, इस दौरान रात में ही किसानों ने हंगामा करते हुए टोल के बैरियर उदिखाड़ ए थे। इसके बाद वाहनों से टोल टैक्स वसूली बंद हो गई थी। 25 दिसंबर 2020 को किसानों ने टोल प्लाजा पर ही स्थायी धरना शुरू कर दिया। इसके बाद से टोल प्लाजा पूरी तरह से बंद रहे। वर्ष भर जिले के दोनों टोल प्लाजा फ्री रहने से एनएचएआई को करीब 189 करोड़ का नुकसान हुआ है।
रविवार को शुरू हो गए थे गंगायचा और डीघल टोल
रविवार को झज्जर का डीघल टोल व रेवाड़ी का गंगायचा टोल शुरू हो गया था। किसान आंदोलन के चलते 76 दिन बाद हरियाणा के रेवाड़ी में गंगायचा टोल रविवार की देर शाम से खुल गया। जिले में किसान आंदोलन के कारण बंद रहे टोल को 76 दिन में 9 करोड़ 88 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं किसान आंदोलन के चलते एक साल बंद से हाईवे के कारण पेट्रोल पंप संचालकों को अरबों रुपये की हानि हुई है। वहीं डीघल टोल प्लाजा 25 दिसंबर 2020 से बंद पड़ा था। किसान आंदोलन के चलते यहां से वाहन अब तक बिना रोक-टोक के गुजर रहे थे। टोल कंपनी को पिछले 11 माह से ज्यादा समय में करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। रविवार को 10 बजकर 9 मिनट पर टोल वसूली शुरू हो गई है।