एड्स से बचाव के लिए सतर्कता जरूरी है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को जागरूक करने के लिए हर वर्ष विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है। विभाग की ओर से लगातार की जा रही टेस्टिंग के दौरान चालू वित्त वर्ष में अब तक एड्स के 62 मरीज मिले हैं, जिनको एआरटी सेंटर से मरीजों को दवा उपलब्ध कराई जा रही है। विभाग की ओर से हर माह 100 से 150 मरीजों की एचआईवी से संबंधित काउंसिलिंग की जाती है।
60 मरीजों की होती है काउंसिलिंग
जिले में वर्ष 2002 में आईसीटीसी में एचआईवी काउंसिलिंग और टेस्टिंग की शुरुआत हुई। तब एक महीने में करीब 100 से 150 मरीजों की जांच होती थी, जिले में टेस्टिंग और काउंसिलिंग बढ़कर लगभग 5000 हो गई है। अगले वर्ष के लिए मुख्यालय की ओर से सोनीपत जिले को 85 हजार टेस्टिंग का लक्ष्य मिला है। एसटीआई क्लीनिक में प्रतिदिन 50 से 60 मरीजों को यौन संक्रमित रोगों से संबंधित काउंसिलिंग, टेस्टिंग व दवाइयां उपलब्ध करवाई जाती हैं।
अब तक 635 लोगों को नशा छुड़वाने के लिए दवा दी
जिले में ओएसटी सेंटर की शुरुआत वर्ष 2012 में हुई, जिसका लक्ष्य सुई का नशा करने वाले लोगों को नशा छुड़वाना है। शुरुआत में 6 मरीज थे और आज 635 मरीज पंजीकृत हैं, जो नशा छोड़ने की मुहिम में अपनी दवाइयां रोजाना ओएसटी सेंटर से ले रहे हैं। यह सेंटर देश में दूसरे व प्रदेश में प्रथम स्थान पर है।
एड्स नियंत्रण के लिए 1762 लोगों को दी जा रही दवा
सोनीपत में एआरटी सेंटर की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई। उस दौरान मात्र 500 मरीज दवाई ले रहे थे, लेकिन इतने कम समय में ही यह संख्या बढ़कर 1762 तक पहुंच गई है। विभाग की ओर से एड्स नियंत्रण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही लोगों को एड्स से बचाव के लिए जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। समय-समय पर एचआईवी पीड़ित मरीजों की कांउसिलिंग की जाती है। इन सेंटरों पर गर्भवती महिलाएं, टीबी के मरीज, हाई रिस्क ग्रुप व स्वैच्छिक जांच कराने वाले लोगों की गोपनीयता को पूर्ण रखते हुए उनको सभी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
एचआईवी पॉजिटिव होने के कुछ प्रमुख लक्षण
- लगातार वजन का घटना
- लगातार दस्त होना
- लगातार बुखार होना
- टीबी की बीमारी होना
- शरीर पर खाज, खुजली, त्वचा में संक्रमण होना
- हरपीज की बीमारी होना
- मुंह में छाले, जीभ पर फफूंदी आना
- गले में गांठ बनना
- गुर्दों व हृदय का संक्रमण
- दिमाग का संक्रमण
- सांस की बीमारी एवं निमोनिया
वर्जन
जिले में एचआईवी के उपचार की पूरी व्यवस्था है। एचआईवी पॉजिटिव होने का पता लगने पर उपचार शुरू हो जाता है। अब तक जिले में एड्स के 1762 मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
- डॉ. तरुण यादव, उप सिविल सर्जन